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Power Crisis: भूपेश बघेल ने नहीं निभाई अशोक गेहलोत से दोस्ती, राजस्थान को बिजली संकट से बचाने आगे आए योगी आदित्यनाथ

Fri, 24 Dec 2021 05:11 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Fri, 24 Dec 2021 05:11 PM IST
सार

बिजली संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल से इस बारे में बातचीत करेंगे। वहां के स्थानीय कुछ कारण हो सकते हैं। जल्द इसका समाधान करने की कोशिश की जाएगी।

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Bhupesh Baghel did not play friendship with Ashok Gehlot Yogi Adityanath came forward to save Rajasthan from power crisis
अशोक गहलोत - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कोयला खान को लेकर राजस्थान और छत्तीसगढ़ का मसला सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। आने वाले दिनों में दोनों सरकारों के बीच चल रही तनातनी का खामियाजा राजस्थान की जनता को भुगतना पड़ सकता है। अगले चार से पांच दिनों में अगर कोयले की पूरी सप्लाई छत्तीसगढ़ से नहीं मिली तो राजस्थान के ज्यादातर बिजली घरों में बिजली उत्पादन ठप पड़ सकता है। जिससे राज्य के ज्यादातर हिस्से अंधेरे में डूब सकते है। बढ़ते संकट को देखते हुए राजस्थान सरकार की मदद के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगे आए है। उन्होंने राजस्थान सरकार को इस मुसीबत में मदद करने के लिए एक अनुबंध किया है। इससे राजस्थान को बिजली संकट से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है।

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अमर उजाला को विश्वस्त सूत्र ने बताया कि राज्य में गहराते बिजली संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल से इस बारे में बातचीत करेंगे। वहां के स्थानीय कुछ कारण हो सकते हैं। जल्द इसका समाधान करने की कोशिश की जाएगी।
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दरअसल, 2 नवंबर को केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय और 21 अक्टूबर को वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पारसा कैंटे कोल ब्लॉक के नए एरिया से खनन के लिए राजस्थान सरकार को मंजूरी दे चुके हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले दो माह से इसकी मंज़ूरी को रोक रखा है। आवंटित कोल ब्लॉक से कोयला खनन की मंजूरी देने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत छत्तीसगढ़ के सीएम बघेल से फोन पर चर्चा करने से लेकर उन्हें पत्र लिखने जैसी तमाम कार्रवाई भी अपने स्तर पर कर चुके है, लेकिन इसके बाद भी छत्तीसगढ़ सरकार राजस्थान को आवंटित कोयला खान के नए ब्लॉक से कोयला खनन की अनुमति प्रदान नहीं कर रही है।
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संकट को दूर करने के लिए यूपी से करार
इधर प्रदेश में गहराए बिजली संकट को कम करने के लिए अब राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश से करार किया है। छत्तीसगढ़ में पर्याप्त कोयला आपूर्ति में देरी के बीच राज्य सरकार अब उत्तर प्रदेश से 700 मेगावाट बिजली उधार ले रही है। दोनों के बीच बैंकिंग प्रक्रिया के तहत अनुबंध हुआ है। इसके तहत बिजली लेने की प्रक्रिया (सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे की बीच) शुरू कर दी गई है। 40 से 42 लाख बिजली प्रतिदिन अगले वर्ष फरवरी तक ली जाएगी। इसमें राजस्थान जितनी बिजली लेगा, उसे उतनी ही बिजली वापस लौटानी होगी। लौटने की प्रक्रिया अगले साल जुलाई- अगस्त तक शुरू होगी।

बिजली घरों में महज एक सप्ताह का कोयला
राजस्थान में रबी के फसली सीजन में किसानों को दिन में सिंचाई के लिए पानी देना भी अब चुनौती बन गया है। प्रदेश के अधिकांश बिजली घरों में एक सप्ताह का कोयला बचा है। ऐसे में बिजली उत्पादन की भारी कमी प्रदेश में आ सकती है। राज्य के हालत इतने खराब हो गए हैं कि कोयले की रैक भी औसत 16-17 से घटकर अब 14 ही मिल पा रही हैं। जबकि प्रदेश की जरूरत रोजाना 27 रैक कोयले की है। अगर प्रदेश में बिजली प्रोडक्शन ठप हुआ तो राज्य सरकार को महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी। जिसका खामियाजा जनता या सरकार को भुगतना पड़ेगा।

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक,अगले 4 दिन में कोयले की पूरी सप्लाई छत्तीसगढ़ से नहीं मिली, तो प्रदेश में ज्यादातर बिजली घरों में पावर प्रोडक्शन ठप पड़ सकता है। प्रदेश का ज्यादातर हिस्सा अंधेरे में डूब सकता है। कोल इंडिया की सब्सिडियरी कंपनियों से राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम का रोजाना 11.5 रैक कोयले का कॉन्ट्रैक्ट है,लेकिन वहां से 8-9 रैक ही मिल पा रहे हैं। प्रदेश में करीब 45 लाख यूनिट बिजली रोजाना उधार भी ली जा रही है। जो वापस चुकानी पड़ेगी।

जयपुर में रैली में गहलोत रख चुके है अपनी बात
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में कोयले की किल्लत को लेकर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को कुछ दिनों पहले एक पत्र भी लिखा था। पत्र में उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोयला खदानों की मंजूरी में देरी से होने वाले राजनीतिक नुकसान का जिक्र किया है। पत्र में कहा गया है कि, दिसंबर के अंत तक राजस्थान स्थित बिजली संयंत्रों में कोयले का संकट होगा। यदि कोयला खदानों को मंजूरी नहीं दी जाती है, तो राज्य को महंगे दामों पर कोयला खरीदना होगा, जिससे लागत और उपभोक्ता पर बोझ बढ़ेगा।

इससे पहले नवंबर में गहलोत ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कोयला खदानों को जल्द मंजूरी देने की अपील की थी। पत्र लिखे जाने के एक महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए अब मामला सोनिया गांधी तक ले जाया गया है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में जयपुर में हुई कांग्रेस की रैली में हिस्सा लेने आई सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी सीएम अशोक गहलोत ने छत्तीसगढ़ सीएम की शिकायत कर सहयोग नहीं करने के आरोप लगाए हैं।


इन कारणों से रुका है मामला
दरअसल, कोयला खनन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के वन विभाग ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। कोयला खदान क्षेत्र वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है जहां स्थानीय जनजातियां खनन प्रक्रिया का विरोध कर रही हैं और इसलिए बघेल इस मुद्दे पर चुप हैं क्योंकि इससे स्थानीय विरोध हो सकता है।

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