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भोपाल गैस त्रासदी : सुप्रीम कोर्ट केंद्र की याचिका पर 11 फरवरी को करेगा सुनवाई

Wed, 29 Jan 2020 02:16 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 29 Jan 2020 02:16 PM IST
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Bhopal Gas Tragedy Supreme Court to hear Center petition on 11 February
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए 7,844 करोड़ रुपये के अतिरिक्त फंड की मांग वाली केंद्र सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई शुरू होने पर न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि हम 11 फरवरी को इस पर सुनवाई करेंगे। यह सुनवाई अब अन्य न्यायाधीश करेंगे। 

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1984 की भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए अमेरिका स्थित यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन (यूसीसी) की उत्तराधिकारी कंपनियों से 7,844 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दिलाने का अनुरोध करने वाली केंद्र की याचिका पर अब 11 फरवरी को सुनवाई होगी।
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न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायधीशों की अलग पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी। पांच सदस्यीय पीठ का हिस्सा रहे न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट ने मंगलवार को यह कहते हुए इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था कि पहले वह इस मामले में भारत सरकार की ओर से पेश हुए थे, जब सरकार ने पुनर्विचार का अनुरोध किया था।
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केन्द्र चाहता है कि गैस त्रासदी से पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के लिये पहले निर्धारित की गई 47 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि के अलावा यूनियन कार्बाइड और दूसरी फर्मो को 7,844 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने का निर्देश दिया जाए। यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन के भोपाल स्थित संयंत्र से दो-तीन दिसंबर, 1984 को एमआईसी गैस के रिसाव के कारण हुई त्रासदी में तीन हजार से अधिक लोग मारे गये थे और 1.02 लाख लोग इससे बुरी तरह प्रभावित हुए थे।

यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन ने इस त्रासदी के लिये मुआवजे के रूप में 47 करोड़ अमेरिकी डॉलर दिये थे। इस गैस त्रासदी से पीड़ित व्यक्ति पर्याप्त मुआवजा और इस जहरीली गैस के कारण हुई बीमारियों के समुचित इलाज के लिये लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

केन्द्र ने दिसंबर, 2010 में मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिये शीर्ष अदालत में सुधारात्मक याचिका दायर की थी। भोपाल की एक अदालत ने सात जून, 2010 को यूनियन कार्बाइड इंडिया लि. के सात अधिकारियों को इस हादसे के संबंध में दो साल की कैद की सजा सुनाई थी।


इस मामले में यूसीसी का अध्यक्ष वारेन एण्डरसन मुख्य आरोपी था, लेकिन वह मुकदमे की सुनवाई के लिये कभी भी पेश नहीं हुआ। भोपाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने एक फरवरी, 1992 को उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। भोपाल की अदालत ने एंडरसन की गिरफ्तारी के लिये 1992 और 2009 में गैर जमानती वारंट जारी किये थे। एण्डरसन की सितंबर, 2014 में मृत्यु हो गयी थी।

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