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भीमा कोरेगांव हिंसा: एक नवंबर तक गौतम नवलखा की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक

Sat, 27 Oct 2018 02:10 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Updated Sat, 27 Oct 2018 02:10 AM IST
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Bhima Koregaon Violence: High court restrains Gautam Navlakha arrest till November 1

भीमा कोरेगांव केस में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को बॉम्बे हाईकोर्ट से फौरी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश जारी रखते हुए नवलखा की गिरफ्तारी पर 01 नबंबर तक के लिए रोक बरकरार रखी। 

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जस्टिस रंजीत मोरे एवं जस्टिस भारती डांगरे की खंडपीठ ने नवलखा की याचिका पर सुनवाई 01 नवंबर तक स्थगित कर दी और गिरफ्तारी के खिलाफ जारी अंतरिम राहत को उस तिथि तक बरकरार रखा। दरअसल, नवलखा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके आग्रह किया है कि पुणे पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की जाए।

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जमानत याचिका खारिज होने के बाद अरुण फेरेरा और वर्नोन गोंजालवीस पुलिस हिरासत में

Bhima Koregaon Violence: High court restrains Gautam Navlakha arrest till November 1

भीमा कोरेगांव हिंसा में नक्सलियों से नजदीकी के आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फेरेरा, वर्नोन गोंजालवीस और सुधा भारद्वाज की जमानत याचिकाएं पुणे की एक अदालत ने शुक्रवार को खारिज कर दी। इसके बाद पुलिस ने फेरेरा और गोंजालवीस को हिरासत में ले लिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश) के. डी. वडाणे ने अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद गोंजालवीस, फेरेरा और भारद्वाज की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी। अधिकारी ने बताया कि पुणे पुलिस शनिवार को सुधा भारद्वाज को हिरासत में ले सकती है।

उक्त तीनों आरोपी पहले से हाउस अरेस्ट थे। कई अदालतों के स्थगनादेश के कारण पुणे पुलिस इनको हिरासत में नहीं ले पाती थी। अब जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद पुणे पुलिस ने अरुण फेरेरा और वर्नोन गोंजालवीस को हिरासत में लिया है।

बता दें कि पुणे पुलिस ने तेलुगू कवि पी. वरवरा राव और गौतम नवलखा के साथ उक्त तीन सामाजिक कार्यकर्ताओं को भीमा कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में अगस्त महीने में पकड़ा था। पुणे में पिछले साल 31 दिसंबर को एल्गार परिषद सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसके एक दिन बाद 01 जनवरी को भीमा-कोरेगांव हिंसा भड़की थी। पुलिस का आरोप है कि एल्गार परिषद के समर्थकों में से कुछ के माओवादियों से संबंध थे। 

अभियोजन पक्ष ने उक्त जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ उसके पास ‘प्रमाणित किए जा सकने वाले साक्ष्य’ मौजूद हैं जो उनकी माओवादी गतिविधियों में शामिल होने की पुष्टि करते हैं। इन गतिविधियों में काडर को संगठित करना, प्रतिष्ठित संस्थानों से छात्रों की भर्ती करना और उन्हें ‘पेशेवर क्रांतिकारी’ बनने, धन जुटाने और हथियार खरीदने के लिए दूरस्थ इलाकों में भेजना शामिल है। 

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