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भीमा कोरेगांव हिंसा: फादर स्टैन ने जेल में स्ट्रा और सिपर मांगा, एनआईए ने जवाब देने को 20 दिन मांगे

Sat, 07 Nov 2020 07:37 PM IST
दीप्ति मिश्रा पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sat, 07 Nov 2020 07:37 PM IST
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bhima koregaon case Stan Swamy files plea to allow use of straw  sipper in Taloja jail
bhima koregaon
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक टीम ने पिछले महीने झारखंड की राजधानी रांची के बाहरी इलाके से सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी को गिरफ्तार किया था। फादर स्टैन स्वामी भीमा कोरेगांव हिंसा और माओवादियों से संबंध रखने के मामले में मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं। 82 वर्षीय फादर स्टैन ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जेल में स्ट्रा और सिपर के इस्तेमाल की इजाजत मांगी है। हालांकि, एनआईए ने इस पर जवाब देने के लिए 20 दिन का वक्त मांगा है। 
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झारखंड में आदिवासियों के उत्थान के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टैन की याचिका पर विशेष कोर्ट के जज डीई कोठालिकर ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जवाब मांगा है। एनआईए भीमा कोरेगांव मामले की जांच कर रही है। अब इस मामले की 26 नवंबर को सुनवाई होगी।
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 एनआईए ने आठ अक्तूबर को फादर स्टैन को झारखंड में उनके घर से गिरफ्तार किया था। माओवादियों से संबंध रखने और भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में सुधीर धवाले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, अरुण फेरेरिया , वरनन गोंजाल्विस, हनी बाबू, शोमा सैन, महेश राउत, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा और आनंदतेलतुबंडे जैसे सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, प्रोफेसर, वकील और सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ता पहले ही जेल में बंद हैं।
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पिछले महीने विशेष एनआईए अदालत ने स्वामी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। स्वामी ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी। एनआईए ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि स्वामी को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम के सख्त कानून (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया है। लिहाजा उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।


बता दें कि भीमा कोरेगांव में बने युद्ध स्मारक पर एक जनवरी, 2018 को हिंसा भड़क उठी थी। पुणे के एक इलाके में एक दिन पहले हुई एल्गार परिषद में दिए गए भड़काऊ भाषणों को कथित तौर पर इसके लिए जिम्मेदार माना गया। एनआईए का आरोप है कि स्वामी के सीपीआई (माओवादी) से रिश्ते हैं और हिंसा को भड़काने में उनका भी हाथ था। स्वामी को पिछले माह गिरफ्तार करने की भारी आलोचना हुई थी। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि केंद्र ने सारी मर्यादाएं लांघ ली हैं।
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