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भीमा कोरेगांव : पुलिस सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेशों का कर रही है मुकाबला

Wed, 26 Dec 2018 08:34 PM IST
आसिम खान भाषा, पुणे
भाषा, पुणे Published by: आसिम खान Updated Wed, 26 Dec 2018 08:34 PM IST
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Bhima Koregaon case: Police is tracking fake reports running on social media

महाराष्ट्र के कोरेगांव भीमा युद्ध के एक जनवरी 2019 को 201 साल पूरा होने के मौके पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम से पहले पुलिस सोशल मीडिया पर ‘नफरत फैलाने’ वालों पर नजर रख रही है और भड़काऊ संदेशों का मुकाबला करने के लिए स्थानीय लोगों की मदद ले रही है। सन् 1818 में हुई लड़ाई को इस साल एक जनवरी को दो सौ साल हुए थे। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कोरेगांव भीमा गांव के आसपास जातीय हिंसा हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई जख्मी हो गए थे।

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सोशल मीडिया पर ‘घृणा के प्रचार’ का मुकाबला करने के लिए पुलिस ने आसपास के गांवों के कुछ प्रभावशाली लोगों को साथ लिया है और उनकी ‘सकारात्मक’ वीडियो बनाकर पोस्ट की है जिनमें अपील की गई है कि लोग बिना किसी डर के परने गांव आ सकते हैं। वर्ष 1818 में पेशवा की फौज की शिकस्त के मद्देनजर ब्रिटिश सरकार की ओर से लगाया गया ‘जयस्तंभ’ परने गांव के पास ही स्थित है। पुलिस अधीक्षक (पुणे ग्रामीण) संदीप पाटिल ने बुधवार को बताया कि एक जनवरी के कार्यक्रम से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले कई संदेश देखे हैं।
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पाटिल ने कहा कि ऐसी अफवाहों और भड़काऊ सामग्री का मुकाबला करने के लिए सामुदायिक पुलिस के तौर पर हमने सरपंच तथा अन्य प्रभावशाली ग्रामीणों समेत स्थानीय लोगों की वीडियो बनाई हैं जिनमें वे आंगुतकों से अपील कर रहे हैं कि वे एक जनवरी को बिना किसी डर के यहां आ सकते हैं। वे सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी जरूरी इंतजाम कर लिए गए हैं। ऐसी ही एक वीडियो में परने गांव के सरपंच आंगुतकों से कह रहे हैं कि एक जनवरी को उनका गुलाब के फूल और पानी की बोतल से स्वागत किया जाएगा।
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पाटिल ने कहा कि हम एक जनवरी को होने वाले कार्यक्रम से पहले सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 1818 में हुई इस लड़ाई में ब्रिटिश सेना, जिसमें बड़ी संख्या में महार सैनिक शामिल थे, ने पेशवा या ब्राह्मण शासकों को हराया था। इस मौके पर लाखों दलित हर साल एक जनवरी को विजयस्तंभ जाते हैं। पाटिल ने कहा कि पुणे ग्रामीण पुलिस का सोशल मीडिया प्रकोष्ठ भड़काऊ संदेशों का पता लगा रहा है।


उन्होंने कहा कि पुलिस आपत्तिजनक और भड़काऊ संदेश फैलाने वाले 20-25 ऐसे तत्वों के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई कर चुकी है। उन्होंने कहा, ‘‘ सोशल मीडिया पर नजर रखने के अलावा, नक्सल प्रभावित जिलों, नक्सल रोधी प्रकोष्ठों, खुफिया ब्यूरो, एटीएस दस्ते को संदेश भेजकर कहा गया है कि एक जनवरी को होने वाले कार्यक्रम के संबंध में नक्सलियों की संभावित गुप्त बैठक के बारे में पुणे पुलिस को जानकारी दें।’’ 

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