Bhima Koregaon Case: गौतम नवलखा को सुप्रीम कोर्ट से राहत, अदालत ने दिया जेल से रिहा करके नजरबंद रखने का आदेश
गौतम नवलखा नवी मुंबई में एक महीने के लिए नजरबंद रहेंगे। इस दौरान वह किसी भी तरह के संचार उपकरण यानी लैपटॉप, मोबाइल, कंप्यूटर आदि का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
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भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी गौतम नवलखा को सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि नवलखा को तलोजा जेल से रिहा करके नजरबंद रखा जाए। इस दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कई शर्तें भी तय की हैं।
यह है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, अदालत ने नवलखा को अपनी पार्टनर सहबा हुसैन के साथ रहने की इजाजत दे दी है। नवलखा को पुलिस अधिकारियों की ओर से मोबाइल फोन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वह रोजाना पांच मिनट अपने परिवार से बात कर सकेंगे। वहीं, पुलिस अधिकारियों को फोन कॉल की निगरानी करने और रिकॉर्ड रखने का अधिकार दिया गया है। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने आदेश दिया कि खर्च का ड्राफ्ट पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में जमा कराया जाए।
इन शर्तों का भी करना होगा पालन
बता दें कि गौतम नवलखा नवी मुंबई में एक महीने के लिए नजरबंद रहेंगे। इस दौरान वह किसी भी तरह के संचार उपकरण यानी लैपटॉप, मोबाइल, कंप्यूटर आदि का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा वह न तो मीडिया से बात करेंगे और न ही मामले से जुड़े लोगों और गवाहों से बातचीत करेंगे।
Supreme Court asks Maharashtra govt to carry out a necessary evaluation of the place where Bhima Koregaon case accused Gautam Navlakha will be under house arrest. After evaluation, the petitioner shall be placed under house arrest within 48 hours.
— ANI (@ANI) November 10, 2022
इलाज, चश्मे, मच्छरदानी, पुस्तकों की जरूरत समेत कई याचिकाएं लगाईं
नवलखा को एक माह के लिए घर में नजरबंद करने के कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले के कई आरोपियों द्वारा जेल में विभिन्न आवश्यक सुविधाओं की मांग को लेकर दायर याचिकाएं सामने आने लगी हैं। मामले के अभियुक्तों ने उपचार की मांग के अलावा जेल के अंदर किताबें, कुर्सियां, स्ट्रॉ, चश्मे और मच्छरदानी हासिल करने की अनुमति के लिए बार-बार अदालतों का दरवाजा खटखटाया है।