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भीमा कोरेगांव: बॉम्बे हाईकोर्ट का सुधा, अरुण और वेरनॉन को जमानत देने से इनकार
Tue, 15 Oct 2019 11:36 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 15 Oct 2019 11:36 AM IST
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बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को माओवादियों के साथ संपर्क रखने और पुणे में कोरेगांव-भीमा में जाति आधारित हिंसा को कथित तौर पर भड़काने के आरोप में गिरफ्तार नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, अरूण फरेरा और वेरनॉन गोंजाल्विस को जमानत देने से इनकार कर दिया है।
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Mumbai: Bombay High Court denies bail to activists Sudha Bharadwaj, Arun Ferreira and Vernon Gonsalves in connection with Bhima Koregaon case. pic.twitter.com/qYMSjYwy3q
— ANI (@ANI) October 15, 2019
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न्यायमूर्ति सारंग कोटवाल ने तीनों कार्यकर्ताओं की जमानत याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया। पिछले साल अगस्त महीने में महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने आरोपियों को पहले नजरबंद किया था। पुणे की एक सत्र अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिकाएं ठुकराने के बाद 26 अक्टूबर को उन्हें हिरासत में ले लिया गया था।
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उस समय से तीनों कार्यकर्ता जेल में हैं। जिसके बाद उन्होंने पिछले साल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पुलिस ने तीनों आरोपियों और कई अन्य के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।
31 दिसंबर 2017 को एलगार परिषद का आयोजन हुआ था जिसके अगले दिन पुणे के कोरेगांव-भीमा गांव में हिंसा भड़क गई थी। इसी के बाद जनवरी 2018 में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपियों के माओवादियों के साथ संपर्क हैं और वह सरकार का तख्तापलट करने की योजना बना रहे हैं।
हालांकि तीनों आरोपियों का दावा है कि इस मामले में, इस आरोप के समर्थन में पुलिस के पास कोई सबूत नहीं है कि वह और अन्य कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ युद्ध जैसे हालात बना रहे हैं।