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बौद्धिक लड़ाई लड़ने को तैयार भीम आर्मी के समर्थक, जनता के सामने रखेंगे असल चेहरा

Wed, 13 Sep 2017 10:58 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
टीम डिजिटल/अमर उजाला Updated Wed, 13 Sep 2017 10:58 AM IST
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Bhim army to change its image through mind war
bhim army
यूपी के सहारनपुर में बीते मई में हुए हिंसा की घटना से चर्चा में आये भीम आर्मी के समर्थक अब बौद्धिक लड़ाई लड़ने को तैयार है। जनता के बीच जाकर ये समर्थक भीम आर्मी के असल चेहरे से सबको अवगत कराएंगे।
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इन समर्थकों का कहना है कि भीम आर्मी समाज के दलित और पिछड़े लोगों के अस्तित्व का आंदोलन है। यह किसी जाति विशेष के लिए नहीं है। भीम आर्मी पर हिंसा को बढ़ावा देने के लगे आरोपों को खारिज करते हुए समर्थकों ने कहा है कि यूपी की योगी सरकार मनुवादी सोच के तहत शासन चला रही है।
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दलित आंदोलन के अगुवा रहे चन्द्रशेखर पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून(रासुका) लगने की आशंकाओं का विरोध करते हुए समर्थकों का कहना है कि हम पर लगे आरोप झूठे हैं। इस मामले में उन्होंने केंद्र और प्रदेश की योगी सरकार पर एक जाति विशेष के पक्ष में कार्य करने का आरोप लगाया है। 
 
भीम आर्मी के बचाव में आगे आए बौद्धिक चेहरे
दरअसल भीम आर्मी के बचाव के लिए समाज के विभिन्न अंगों से कई बौद्धिक चेहरे ने एक साथ हाथ मिलाया है। विभिन्न क्षेत्र के अलग-अलग 45 चेहरों ने मिलकर कमेटी फॉर द डिफेंस ऑफ भीम आर्मी का गठन किया है।

मंगलवार को दिल्ली के पीसीआई में कुछ चुनिंदा पत्रकारों के साथ चर्चा करते हुए इस समिति के लोगों ने भीम आर्मी पर लगे आरोपों की परत दर परत कलई खोलीं। समिति के संयोजक प्रदीप नरवाल ने कहा कि मई में सहारनपुर में फैली हिंसा और उसके बाद इसके रोकथाम को लेकर की गई कार्रवाई ने प्रदेश की शासन व्यवस्था पर बहुत सारे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस प्रकरण में योगी सरकार का दलित विरोधी रवैया साफ नजर आ रहा है। योगी सरकार चन्द्रशेखर और कमल की जमानत में व्यवधान पैदा कर रही है। 
 
हिंसा में भीम आर्मी की संलिप्तता नहीं
इन बुद्धिजीवियों का कहना है कि सहारनपुर की हिंसा में भीम आर्मी की संलिप्तता नहीं है। हिंसा प्रभावित इलाकों के सीसीटीवी फुटेज में भी हमारी संलिप्तता साबित नहीं हुई है। नरवाल ने कहा ही हमें बदनाम करने की कोशिश हो रही है।

भीम आर्मी दलित और पिछड़ों के बीच शिक्षा के विस्तार और विकास के कार्य करती है, जिसका लाभ दलितों के अलावा समाज के अन्य पिछ्डों को भी मिलता है। लेकिन सामंती सोच के लोग इसे पचा नहीं पा रहे हैं, इसलिए भीम आर्मी को बदनाम करने की कोशिश हो रही है।

 
उन्होंने कहा कि शिव सेना, राम सेना और बजरंग सेना सरीखे कई संगठन हैं जोकि सरासर समाज को बांटने का कार्य करते हैं। उन्हें कोई कुछ नहीं कह रहा है, लेकिन संविधान के दायरे में कार्य करने वाली भीम आर्मी पर झूठे आरोपों को गढ़ बदनाम करने की कोशिश हो रही है।

हम देश के सामने भीम आर्मी का असल चेहरा पेश करेंगे। इस कवायद में जेएनयू और दिल्ली विश्वविधालय में बीते दिनों सफल आयोजन सम्पन्न हुए हैं। आने वाले दिनों में यूपी और देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में आयोजन कर भीम आर्मी के असल चेहरे को देश के सामने रखेंगे।
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