{"_id":"575998984f1c1b23379c5acb","slug":"bharatiya-janata-party-s-demand-to-change-name-of-jawahar-bagh-mathura","type":"story","status":"publish","title_hn":"मथुरा: भाजपा का दावा सीएम अखिलेश को थी पल पल की जानकारी","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
मथुरा: भाजपा का दावा सीएम अखिलेश को थी पल पल की जानकारी
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 09 Jun 2016 09:56 PM IST
विज्ञापन
पार्टी ने दुहराई सीबीआई जांच की मांग
- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा (फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा कांड को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने का एलान कर चुकी भाजपा ने अब जवाहर बाग का नाम बदलने की मांग की है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि शहीदों को सम्मान देते हुए जवाहर बाग का नाम अब शहीद एसपी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव के नाम कर दिया जाना चाहिए। शर्मा ने इस दौरान इस मामले में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की खुफिया और पुलिस-प्रशासन की चूक के दावे को बकवास करार दिया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जवाहर बाग पर कथित सत्याग्रहियों के कब्जे के बाद से ही स्थानीय खुफिया विभाग और पुलिस शीर्ष स्तर पर पल पल की सूचना लगातार दे रही थी। उन्होंने कहा कि चूंकि इसी बहाने जवाहर बाग पर कब्जे की योजना था, इसलिए वहां हथियार जमा होने की सूचना दिए जाने के बावजूद बिजली-पानी की आपूर्ति जारी रखी गई। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने बाग को लीज पर देने की तैयारी भी कर ली थी।
विज्ञापन
शर्मा ने कहा कि उन्होंने 4 जून को मुख्यमंत्री को इस घटना की सीबीआई से जांच कराने और जवाहर बाग का नामकरण शहीद पुलिस अधिकारियों के नाम करने की मांग की थी। मुख्यमंत्री की ओर से इसका कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने कहा कि राज्य के दो पुलिस अधिकारियों को अखिलेश सरकार ने पहले तो जानबूझ कर मौत के मुंह में भेजा। अब इन शहीदों को उचित सम्मान भी देना उन्हें गवारा नहीं है। शर्मा ने कहा कि इस घटना के संदर्भ में मुख्यमंत्री लगातार झूठ बोल रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि घटना खुफिया विभाग या स्थानीय पुलिस की चूक से नहीं हुई। खुफिया विभाग और स्थानीय पुलिस ने तो शुरू से ही राज्य शासन को बाग पर अवैध कब्जा, हथियारों की आपूर्ति सहित कई संवेदनशील जानकारी दी थी। चूंकि इसके जरिए उद्येश्य जमीन पर कब्जा करना था, इसलिए इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने खुफिया और पुलिस की ओर से भेजी गई रिपोर्ट की अनदेखी की।