फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   'Bharat Swastik Yatra' reaches Omkareshwar; Morari Bapu makes emotional appeal to devotees in Navratri.

मध्य प्रदेश: ओंकारेश्वर पहुंची भारत स्वस्तिक यात्रा, मोरारी बापू ने नवरात्र में श्रद्धालुओं से की भावुक अपील

Fri, 16 Oct 2026 12:27 PM IST
पवन पांडेय अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 16 Oct 2026 12:27 PM IST
सार

भारत स्वस्तिक यात्रा के ओंकारेश्वर पहुंचने पर गुरुवार को मोरारी बापू ने रामकथा सुनाई। उन्होंने नवरात्रि में शक्ति की उपासना के साथ सभी जीवों के प्रति करुणा और श्रद्धा रखने की अपील की। बापू ने धर्म के नाम पर पशु बलि को अनुचित बताते हुए इसे बंद करने की बात कही।

विज्ञापन
'Bharat Swastik Yatra' reaches Omkareshwar; Morari Bapu makes emotional appeal to devotees in Navratri.
मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं से की अपील - फोटो : ANI

विस्तार

भारत स्वस्तिक यात्रा ओंकारेश्वर पहुंच चुकी है, जहां गुरुवार को मोरारी बापू ने राम की कथा सुनाईई, जिसमें उन्होंने कहा कि नवरात्रि में शक्ति की पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं से भावुक अपील करते हुए बापू ने कहा, शक्ति की उपासना में समस्त जीवों के प्रति करुणा और श्रद्धा का भाव होना चाहिए। पशु बलि अब बंद होनी चाहिए। इस दौरान मोरारी बापू ने धर्म के नाम पर पशु बलि को रोकने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर पूजा के समय पशु बलि दी जाती है, जो सर्वथा अनुचित है। उन्होंने करुणा और दया को धर्म का मूल आधार बताया। 
विज्ञापन


अहंकार से मुक्त होना सर्वोपरि
मोरारी बापू ने कथा में अभिमान के विभिन्न रूपों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इनमें सबसे श्रेष्ठ अवस्था निरभिमान है अर्थात् अहंकार  से मुक्त होना ही सर्वोपरि है। किसी व्यक्ति केपास कोई योग्यता, ज्ञान या संपत्ति हो और उसके कारण उसमें अभिमान आ जाए तो यह भी उचित नहीं है।
विज्ञापन


ओंकार का स्वस्तिक से गहरा संबंध
भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन के बाद मोरारी बापू ने कहा कि ओंकार का स्वस्तिक से गहरा संबंध है, यह आदि नाद का प्रतीक है। सनातन धर्म में ओंकारेश्वर की भूमि का विशिष्ट महत्व है, क्योंकि इसका संबंध आदि शंकराचार्य और उनके गुरु गोविंद भगवत्पाद की भेंट से है। शंकराचार्य की आध्यात्मिक यात्रा को दिशा देने वाली गुरु-शिष्य परंपरा की अभिव्यक्ति इसी पवित्र भूमि में दिखाई देती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


 
Trending Videos

मोरारी बापू ने मां तुलजा भवानी की आध्यात्मिकता को किया याद
वहीं इससे पहले भारत स्वस्तिक यात्रा के तहत बुधवार को मोरारी बापू की रामकथा महाराष्ट्र के तुलजापुर में हुई। यहां बापू ने कहा कि स्वस्तिक यज्ञकुंड मंगल और सामूहिक कल्याण का प्रतीक है जिसकी विशेषता उसके चार कोनों वाला स्वरूप है। कल्याणकारी स्वस्तिक यज्ञकुंड सबके कल्याण की भावना का प्रतिनिधित्व करता है। मोरारी बापू ने कहा कि मां तुलजा भवानी और छत्रपति शिवाजी महाराज के कारण तुलजापुर हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना में विशेष स्थान रखता है। धर्म की रक्षा के लिए शिवाजी महाराज के संकल्प व तलवार के माध्यम से मां तुलजा भवानी के दिव्य आशीर्वाद से जुड़ी चिरस्थायी परंपरा को भी याद किया गया। 

मोरारी बापू ने नंदा पर यह कहा था 
इससे पूर्व हंपी (कर्नाटक) में संत मोरारी बापू ने कहा था कि गुलजारी लाल नंदा के गृहमंत्री रहने के समय हजारों साधु संसद के सामने इकट्ठा हो गए थे और नंदा खिड़की से देखते रहे। उन्होंने गो हत्या विरोधी कानून या गोलियां चलने की बात नहीं कही थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed