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भारत बंद का असर: 25 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित, एमपी में दिग्विजय सिंह का धरना, छत्तीसगढ़, राजस्थान में आंशिक खुले बाजार

Mon, 27 Sep 2021 03:13 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 27 Sep 2021 03:13 PM IST
सार

किसानों के इस भारत बंद असर दिल्ली के यातायात पर भी पड़ रहा है। दिल्ली-गुरुग्राम हाइवे पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। डीएनडी पर भी गाड़ियों की रफ्तार धीमी होने से सड़कों पर लंबी कतार देखी जा रही है। गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने एनएच-9 और एनएच-24 जाम कर दिया है। किसान बीच सड़क पर बैठ गए हैं, इससे जाम लग गया है...

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Bharat Bandh: More than 25 trains affected, partially open markets in Chhattisgarh, Rajasthan
भारत बंद के चलते दिल्ली गुरुग्राम बॉर्डर पर लगा जाम - फोटो : Agency

विस्तार

देशभर के कई राज्यों में किसानों का भारत बंद जारी है। मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोगध में बुलाए गए इस बंद का सबसे ज्यादा असर पंजाब, हरियाणा, गुड़गांव और दिल्ली में दिखाई दे रहा है। एक ओर किसानों ने जहां हाईवे, टोल प्लाजा पर चक्काजाम कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ किसानों रेलवे ट्रेक पर भी बैठ गए हैं। इससे दिल्ली, अंबाला और फिरोजपुर डिवीजन में रेल यातायात प्रभावित हुआ है। दिल्ली से चलने वालीं कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। दिल्ली से कटरा के लिए चली वंदे भारत एक्सप्रेस पानीपत स्टेशन पर खड़ी है। जबकि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में किसानों के बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला रहा है।

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उत्तर रेलवे के के अधिकारियों ने अमर उजाला को बताया कि किसानों के भारत बंद के कारण दिल्ली, अंबाला और फिरोजपुर डिवीजन में रेल ट्रैफिक प्रभावित हुआ है। दिल्ली डिवीजन में 20 से अधिक स्थानों पर किसान ट्रैक पर बैठे हैं। अंबाला और फिरोजपुर डिवीजनों में करीब 25 ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। इस कारण नई दिल्ली अमृतसर- शान ए पंजाब, नई दिल्ली-मोगा स्पेशल ट्रेन, पुरानी दिल्ली-पठानकोट स्पेशल, नई दिल्ली-अमृतसर शताब्दी और नई दिल्ली-कालका शताब्दी रद्द कर दी गई है। नई दिल्ली से सुबह छह बजे कटरा के लिए चली वंदे भारत एक्सप्रेस पानीपत स्टेशन पर खड़ी है।
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किसानों के इस भारत बंद असर दिल्ली के यातायात पर भी पड़ रहा है। दिल्ली-गुरुग्राम हाइवे पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। डीएनडी पर भी गाड़ियों की रफ्तार धीमी होने से सड़कों पर लंबी कतार देखी जा रही है। गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने एनएच-9 और एनएच-24 जाम कर दिया है। किसान बीच सड़क पर बैठ गए हैं, इससे वाहनों का रास्ता रुक गया है।

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मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह बैठे धरने पर

किसानों के इस बंद का असर मध्यप्रदेश में बहुत कम देखने को मिला। राजधानी भोपाल में इसका खास असर नजर नहीं आया। प्रदेश में कांग्रेस समेत अनेक विपक्षी दलों ने इस बंद को समर्थन दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुआई में बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता भी करोंद मंडी पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए करोंद मंडी गेड पर बैरिकेडिंग कर दी गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात है। इस दौरान दिग्विजय सिंह करोंद मंडी के गेट पर ही धरने पर बैठ गए हैं। दिग्विजय सिंह के साथ उनके भाई लक्ष्मण सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद हैं। प्रदेश के बडे शहर इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रतलाम जैसे शहरों में भारत बंद को मिला-जुआ समर्थन दिखा है। सभी जगहों पर हाईवे पर और मुख्य सड़कों पर वाहनों की आवाजाही जारी है।

छत्तीसगढ़ में खुले रहे बाजार

इधर, छत्तीसगढ़ में राजधानी रायपुर समेत आसपास के जिलों में भारत बंद का असर नहीं दिखा। सभी बाजार आम दिनों की तरह ही पूरी तरह खुले रहे। राजधानी के बूढ़ापारा धरना स्थल में किसान संगठन के नेता जुटे और उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। किसानों के इस बंद को राज्य कांग्रेस पार्टी ने भी समर्थन दिया हैं। छत्तसीगढ़ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार के तीन कृषि कानून के विरोध और कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी का कानून बनाने के लिए है।

राजस्थान के कई शहरों में दिखा बंद का असर

किसानों के भारत बंद का असर राजस्थान के कुछ जिलों में दिखाई दिया। प्रदेशभर में किसानों के साथ मजदूर, छात्र, युवा, महिला, जन संगठन इस बंद में भागीदारी निभा रहे हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने बंद को समर्थन दिया है। जयपुर, जोधपुर, अजमेर और उदयपुर सहित बड़े शहरों में बंद का आंशिक असर रहा। लेकिन सीकर, चुरू, श्रीगानगर, हनुमानगढ़ और झुंझ़ुंनू जिलों में शहरों एवं गांवों के कई बाजार बंद रहे। रोड़वेज और निजी बसों का संचालन आम दिनों की तरह हुआ। यातायात के साधनों को बंद में शामिल नहीं किया गया था। किसान मोर्चे की ओर से बुलाये गये बंद के एलान के बाद शेखावाटी के सबसे बड़े जिले सीकर में इसका व्यापक असर देखा गया है। सीकर शहर में मंगलवार सुबह से ही बाजार नहीं खुले। सीकर में किसानों के इस बंद को व्यापार संघ और निजी शिक्षण संस्थानों ने अपना पूरा समर्थन दिया है।  

गौरतलब है कि किसान संगठन पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी  केंद्र सरकार से तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सरकार और किसान दोनों ही पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन इनका कोई नतीजा नहीं निकला है।

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