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ममता ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा: भवानीपुर में हार पर रार, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जीत को दी चुनौती
Tue, 16 Jun 2026 03:24 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 16 Jun 2026 03:24 PM IST
सार
ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों से हारने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए चुनावी रिकॉर्ड और ईवीएम को सुरक्षित रखने की मांग की है। इस हार से बंगाल में टीएमसी का 15 साल का शासन खत्म हो गया है।
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ममता बनर्जी ने हार मानने से किया इनकार!
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव नतीजों को कानूनी चुनौती दी है। इस सीट पर भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल के वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें शिकस्त दी थी। ममता बनर्जी ने इस चुनावी हार के खिलाफ हाईकोर्ट में एक चुनाव याचिका दायर की है।
गढ़ में मिली शिकस्त
2026 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को अपने इस पुराने गढ़ में करारी हार का सामना करना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने 15,105 मतों के अंतर से पराजित किया। इस अप्रत्याशित हार ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इस चुनावी नतीजे के बाद से ही टीएमसी खेमे में भारी असंतोष और बेचैनी देखी जा रही है। पहले विधायकों ने और अब सांसदों ने भी बगावत कर दी है।
यह भी पढ़ें: Bengal TMC Rift: बगावत-NCPI में विलय पर स्पीकर बिरला लेंगे अंतिम फैसला; ओवैसी ने गिनाए ममता की हार के चार कारण
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सबूतों को सहेजने की मांग
हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में ममता बनर्जी ने बेहद गंभीर मांगें रखी हैं। कानूनी याचिका के जरिए उन्होंने भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के सभी चुनाव संबंधी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आग्रह किया है। इसमें मतदान से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ईवीएम शामिल हैं। ममता बनर्जी का कहना है कि इन उपकरणों और दस्तावेजों को तुरंत सील किया जाए ताकि इनके साथ कोई छेड़छाड़ या इन्हें नष्ट न किया जा सके।
क्या मुकदमेबाजी और ममता का पुराना नाता?
साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर मिली करीबी हार को तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी की जीत को सीधे कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी। ममता बनर्जी का आरोप था कि वोटों की गिनती में धांधली की गई है, इसलिए उन्होंने नंदीग्राम में फिर से मतगणना कराने की मांग की थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले के शुरुआती जज ने ममता बनर्जी पर अदालत का समय खराब करने के आरोप में ₹5 लाख का जुर्माना भी लगाया था, जिसके बाद मामले की सुनवाई दूसरी बेंच को सौंप दी गई।
यह कानूनी लड़ाई आज भी अदालत में जारी है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इतिहास ने खुद को दोबारा दोहराया है। हाल ही में हुए 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से भी हरा दिया है। इस नई हार के बाद ममता बनर्जी ने एक बार फिर चुनावी नतीजों को खारिज करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में दूसरी याचिका दायर कर दी है। इसके चलते अब उच्च न्यायालय में ममता बनर्जी बनाम शुभेंदु अधिकारी के दो अलग-अलग चुनावी विवादों पर एक साथ कानूनी सुनवाई चल सकती है।
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गढ़ में मिली शिकस्त
2026 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को अपने इस पुराने गढ़ में करारी हार का सामना करना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने 15,105 मतों के अंतर से पराजित किया। इस अप्रत्याशित हार ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इस चुनावी नतीजे के बाद से ही टीएमसी खेमे में भारी असंतोष और बेचैनी देखी जा रही है। पहले विधायकों ने और अब सांसदों ने भी बगावत कर दी है।
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सबूतों को सहेजने की मांग
हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में ममता बनर्जी ने बेहद गंभीर मांगें रखी हैं। कानूनी याचिका के जरिए उन्होंने भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के सभी चुनाव संबंधी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आग्रह किया है। इसमें मतदान से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ईवीएम शामिल हैं। ममता बनर्जी का कहना है कि इन उपकरणों और दस्तावेजों को तुरंत सील किया जाए ताकि इनके साथ कोई छेड़छाड़ या इन्हें नष्ट न किया जा सके।
क्या मुकदमेबाजी और ममता का पुराना नाता?
साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर मिली करीबी हार को तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी की जीत को सीधे कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी। ममता बनर्जी का आरोप था कि वोटों की गिनती में धांधली की गई है, इसलिए उन्होंने नंदीग्राम में फिर से मतगणना कराने की मांग की थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले के शुरुआती जज ने ममता बनर्जी पर अदालत का समय खराब करने के आरोप में ₹5 लाख का जुर्माना भी लगाया था, जिसके बाद मामले की सुनवाई दूसरी बेंच को सौंप दी गई।
यह कानूनी लड़ाई आज भी अदालत में जारी है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इतिहास ने खुद को दोबारा दोहराया है। हाल ही में हुए 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से भी हरा दिया है। इस नई हार के बाद ममता बनर्जी ने एक बार फिर चुनावी नतीजों को खारिज करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में दूसरी याचिका दायर कर दी है। इसके चलते अब उच्च न्यायालय में ममता बनर्जी बनाम शुभेंदु अधिकारी के दो अलग-अलग चुनावी विवादों पर एक साथ कानूनी सुनवाई चल सकती है।