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चोटी रखने पर नर्सरी के छात्र को स्कूल से निकाला

Sat, 11 Jun 2016 12:39 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 11 Jun 2016 12:39 PM IST
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Bengaluru school expels nursery boy for sporting ponytail
डेमो पिक - फोटो : getty images

बंगलूरू के एक निजी स्कूल ने नर्सरी में पढ़ने वाले बच्चे को केवल इसलिए स्कूल से बाहर निकाल दिया क्योंकि उसकी 'चोटी' थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परिवार के लोगों ने बच्चे की चोटी रखी थी लेकिन स्कूल के नियमानुसार इसकी मनाही थी जिसकी वजह से उसे बाहर निकाल दिया गया।

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यह घटना सोमवार की है। जब 6 जून को बच्चे की मां मंजूनाथ बीसी उसे लेने के लिए बापूसाब पाल्या में स्थित संत विंसेंट पल्लोटी स्कूल पहुंची तो फॉदर ने उन्हें इसकी जानकारी दी। फॉदर ने बताया कि उनके बच्चे को चोटी रखने की वजह से स्कूल के निकाल दिया गया है। स्कूल के नियम इस बाद की ईजाजत नहीं देते कि कोई बच्चा चोटी रखे।
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टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक स्कूल के प्रिंसिपल फादर पॉल डीसूजा ने मंजूनाथ को बताया कि अगर वह अपने बच्चे को स्कूल में पढ़ाना चाहती हैं तो उन्हें अपने बच्चे की चोटी कटवानी पड़ेगी। इस बारे मंजूनाथ ने बताया कि वह धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपने बच्चे की चोटी उसके पांच साल के होने के पहले नहीं काट सकती। उनका बेटा अभी सिर्फ साढ़े तीन साल का है। 
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मंजूनाथ ने बताया, 'मैंने प्रिंसिपल सेअनुरोध किया कि वह चोटी रखने की इजाजत दें लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा वह विष्णु या उनके परिवार को स्कूल परिसर में आने की अनुमति नहीं दे सकते।' इतना ही नहीं फादर ने बच्चे की फीस (43,000 रुपए) भी लौटा दिए और वहां से जाने के कहा। 

अंधविश्वास को नहीं मानने के लिए कहा

Bengaluru school expels nursery boy for sporting ponytail

उन्होंने बताया, 'मैं प्रिसिंपल के पैरों में गिर गई और उनसे अपने बच्चे को पढ़ने देने के लिए गुहार भी लगाई, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।' 7 जून से अब तक मंजूनाथ ने करीब दर्जनभर स्कूलों के चक्कर काट चुकी हैं लेकिन एडमिशन बंद होने की वजह से उनके बच्चे को कहीं दाखिला नहीं मिला। अब उन्हें अगली साल तक इंतजार करना पड़ेगा।

वहीं फादर डीसूजा ने ऐसे किसी भी आरोपों से इनकार करते हुए कहा, 'मैं उनसे इस तरह की किसी भी अंधविश्वास को नहीं मानने के लिए कहा। इस तरह की मान्यताओं को मानना स्कूल के नियमों के खिलाफ है। हम दूसरे बच्चों के लिए अलग-अलग नियम नहीं बना सकतें।'

इस बाबत जब शिक्षा निदेशक के आनंद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी उनके पास ऐसी किसी भी तरह की शिकायत नहीं आई है। उन्होंने कहा, 'हम आने वाले दिनों में इस मामले की जांच करेंगे और विभाग इस बात का फैसला करेगा। हम अभिवावकों के शिकायत का इंतजार कर रहे हैं।'

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