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चुनाव बाद बंगाल में हिंसा: मानवाधिकार आयोग ने शुरू की जांच, दो टीमें पहुंची
Fri, 25 Jun 2021 04:39 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, कोलकाता
एजेंसी, कोलकाता
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 25 Jun 2021 04:39 AM IST
सार
- पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा की सच्चाई को लेकर मानवाधिकार आयोग ने जांच शुरू कर दी है
- डीआईजी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में पहुंचे दो दलों ने कोलकाता और सिलीगुड़ी में अलग-अलग कई इलाकों का दौरा भी किया
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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विस्तार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दो दल बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल पहुंच गए। पुलिस के मुताबिक, चुनाव के बाद राज्य में होने वाली हिंसा की सच्चाई जानने पहुंचे डीआईजी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में पहुंचे इन दलों ने कोलकाता और सिलीगुड़ी में अलग-अलग कई इलाकों का दौरा भी किया। यह दल उस आयोग के उस सात सदस्यीय दल की मदद करेगा, जिसका गठन कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर एनएचआरसी सदस्य राजीव जैन के नेतृत्व में किया गया है। यह सात सदस्यीय दल अभी कोलकाता नहीं पहुंचा है।
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हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले ही दे चुके हैं ममता की सरकार को नोटिस
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद हुई हिंसा की वजह से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ने जा रही हैं। कोलकाता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ऐसे कई मामलों में राज्य सरकार को पहले ही नोटिस जारी कर चुकी हैं। अब भाजपा ने केंद्रीय मानवाधिकार आयोग और केंद्रीय महिला आयोग के पास गुहार लगाने का फैसला किया है।
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पार्टी का मानना है कि उनके पास सत्तारूढ़ दल और राज्य सरकार द्वारा हिंसा को प्रायोजित करने के पुख्ता सबूत हैं। ऐसे में राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया जा सकता है। इस तरह वह लगातार तृणमूल कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाए रख सकती है। भाजपा नेताओं का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस हिंसा का सहारा लेकर उनकी पार्टी का वही हाल करना चाहती है, जो उसने पिछले 10 वर्षों में कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और उनके सहयोगी दलों का किया है।
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बता दें कि कोलकाता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को सौंपने संबंधी आदेश 21 जून को वापस लेने से इंकार करते हुए इस बारे में राज्य सरकार का आवेदन खारिज कर दिया था। अदालत ने मानवाधिकार आयोग को एक समिति गठित कर राज्य में चुनाव बाद हिंसा के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं की जांच करने का आदेश दिया था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष अरुण मिश्रा ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने जनहित याचिकाओं के एक समूह पर पारित आदेश को वापस लेने का पश्चिम बंगाल सरकार का आवेदन खारिज कर दिया। इन जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि राजनीतिक हमलों की वजह से लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा, उनके साथ मारपीट की गई, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और कार्यालयों में लूटपाट की गई।
पीठ ने 18 जून को पश्चिम बंगाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव (डब्ल्यूएमएलएसए) की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए यह आदेश सुनाया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि इन घटनाओं से 10 जून दोपहर 12 बजे तक 3,243 लोग प्रभावित हुए हैं।