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इस परिवार के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस बनी मसीहा, लौटाई खोई हुईं खुशियां

Mon, 03 Dec 2018 10:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरहमपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरहमपुर Updated Mon, 03 Dec 2018 10:28 AM IST
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bengal police take care of a rajasthani man and after treatment ensure his returns him to family
सांकेतिक तस्वीर

37 साल के धर्मबीर दास के लिए पश्चिम बंगाल के बरहमपुर जिले में स्थित पागलखाना पिछले दो सालों से एक घर था। शुक्रवार की रात को उसे स्थानीय पुलिस ट्रेन से दिल्ली लेकर आई। जिसके बाद एक बॉलीवुड जैसी कहानी का अंत हुआ। दास राजस्थान के भरतपुर जिले के खोह गांव का रहने वाला है। सितंबर 2016 को वह बंगाल के मुर्शिदाबाद रेलवे स्टेशन के नजदीक घूम रहा था। 

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कुछ हफ्तों पहले ही वह सबकुछ भूल चुका था कि वह कौन है। जियागंज पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष अभिजीत बासु मलिक ने कहा, 'जब वह मिला तो दास अपनी भाषा और हिंदी के कुछ शब्द बोल रहा था लेकिन उसके द्वारा बोले जाने वाले शब्दों को स्थानीय लोग समझ नहीं पा रहे थे। उसे यहां तक कि अपना नाम और घर का पता तक याद नहीं था।' 
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मलिक ने कहा, 'हमें अहसास हुआ कि इसे इलाज की जरूरत है और हमने लालबाग अदालत से गुजारिश की कि हमें उसे बरहमपुर पागल खाने ले जाने की अनुमति दें। हमारी मांग मान ली गई। हमने दास को 29 अक्तूबर, 2016 को अस्पताल में भर्ती करवाया। एक साल तक दास पर इलाज का कोई फर्क नहीं पड़ा। इस साल जनवरी से उसकी हालत में सुधार आया। उसने डॉक्टरों को बताया कि वह भरतपुर का रहने वाला है।'
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पुलिस अधिकारी ने कहा, '19 नवंबर को अस्पताल के अधिकारियों ने हमें बताया कि दास अच्छा महसूस कर रहा है और हम उससे मिल सकते हैं। दास ने हमें जो बताया उसके आधार पर हमने राजस्थान के लक्ष्मणगढ़ पुलिस से संपर्क किया। राजस्थान पुलिस ने हमारी मदद की और कफनवड़ा गांव में रहने वाली दास की मां से संपर्क किया।' जिस परिवार को लग रहा था कि दास अब कभी नहीं आएगा वह यह सुनकर चौंक गए कि वह ठीक है।


दास को लेने के लिए उनके साले अजय कुमार आए थे। उन्होंने कहा दास 2015 में दिल्ली गए थे और एक निर्माण स्थल पर मजदूरी करते थे। लेकिन वह 2016 से गायब हो गए। हमारा परिवार हमेशा मुर्शिदाबाद पुलिस का आभारी रहेगा जिसने दो सालों तक धर्मबीर की देखभाल की। दास को उसके परिवार के पास वापस भेजने पर पुलिस भी काफी खुश है।

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