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बंगालः पंचायत होंगे भ्रष्टाचार मुक्त, प्रधानों के हाथ से जाएगी भुगतान की शक्ति; भाजपा सरकार ला सकती है विधेयक

Tue, 14 Jul 2026 07:46 PM IST
Pavan अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Published by: Pavan Updated Tue, 14 Jul 2026 07:46 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में पंचायतें भ्रष्टाचार मुक्त होगी, इसके साथ ही प्रधानों के हाथ से भुगतान की शक्ति हटने वाली है। इसे लेकर पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि वित्तीय लेन-देन अब सचिवों और अधिकारियों के जरिए होगा। जानकारी के अनुसार, सरकार बजट सत्र के दूसरे चरण में पंचायत कानून संशोधन विधेयक ला सकती है।

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Bengal: Panchayats to become corruption-free; Pradhan to lose payment authority; BJP govt may introduce a bill
दिलीप घोष, पंचायत मंत्री, पश्चिम बंगाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल सरकार पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने मंगलवार को संकेत दिया कि पंचायत स्तर पर होने वाले वित्तीय लेन-देन और भुगतान की प्रक्रिया अब प्रधानों के बजाय पंचायत सचिवों और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार पंचायत कानून में संशोधन की तैयारी कर रही है।
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बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश हो सकता है विधेयक
संभावना है कि 17 से 25 जुलाई तक चलने वाले विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण में इससे संबंधित विधेयक पेश किया जाएगा। दिलीप घोष ने कहा कि पंचायतों में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के कारण अक्सर सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का निर्णय लिया गया है।
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सरकार ने क्यों लिया बदलाव का फैसला?
उन्होंने बताया कि अभी तक पंचायतों के तहत संचालित विभिन्न विकास योजनाओं और परियोजनाओं में धनराशि जारी करने तथा भुगतान की शक्ति पंचायत प्रधानों के पास होती थी। लेकिन कई मामलों में धन के दुरुपयोग और अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भुगतान और वित्तीय स्वीकृति की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में होगी। सरकार का मानना है कि इससे वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी।

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बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान पंचायतों को लेकर भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए थे। प्रधानमंत्री आवास योजना और 100 दिन रोजगार योजना में कथित अनियमितताओं, फर्जी लाभार्थियों और धन के दुरुपयोग के आरोपों ने पंचायत व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। नई सरकार का मानना है कि वित्तीय अधिकारों के पुनर्वितरण और प्रशासनिक निगरानी बढ़ने से ऐसी शिकायतों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
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