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हड़ताली डॉक्टरों ने ममता से बातचीत से किया इनकार, सीएम से अस्पताल आने को कहा

Sat, 15 Jun 2019 04:37 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 15 Jun 2019 04:37 PM IST
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Bengal healthcare system is at an imminent collapse, 700 doctors resigned from their post
नारपीट के विरोध में देशभर के डॉक्टरों ने शुक्रवार को हड़ताल की - फोटो : PTI

प. बंगाल में हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका जताते हुए राज्य सचिवालय में ममता बनर्जी के साथ शनिवार को बंद कमरे में बैठक का आमंत्रण ठुकरा दिया और कहा कि मुख्यमंत्री को गतिरोध दूर करने के उद्देश्य से खुले में चर्चा के लिए एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल आना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि शनिवार की शाम में राज्य सचिवालय में बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में आंदोलनकारी डॉक्टरों का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं होगा। जूनियर डॉक्टरों के संयुक्त फोरम के एक प्रवक्ता ने संगठन की संचालन इकाई की बैठक के बाद कहा कि हम बहुत असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और मुख्यमंत्री के साथ बंद कमरे में अपने प्रतिनिधियों की बैठक को लेकर आशंकित हैं। इसीलिए हम बैठक में शामिल होने के लिए अपने किसी भी प्रतिनिधि को मुख्यमंत्री कार्यालय नहीं भेज रहे हैं।
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डॉक्टरों ने बंद कमरे में बैठक की जगह बनर्जी को बातचीत के लिए नील रत्न सरकार (एनआरएस) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल आने को कहा है जहां दो डॉक्टरों पर हमला हुआ था।

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सुरक्षा देने की मांग

उनकी मांग है कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार की रात डॉक्टरों को मिलने के लिए बुलाया था लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। जिसके बाद उन्होंने शनिवार को एक बार फिर उन्हें मिलने के लिए आमंत्रित किया है ताकि सरकारी अस्पतालों में जारी हड़ताल को खत्म किया जा सके। डॉक्टरों की मांग हैं कि वह उनसे बिना शर्त माफी मांगे। उन्होंने ममता बनर्जी से बातचीत करने से इनकार कर दिया है।


दिनभर स्वास्थ्य सेवा बंद रहीं जिसपर लगभग पूरे दिन पश्चिम बंगाल सरकार चुप्पी साधे रही। इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसएसकेएम अस्पताल पहुंची और उन्होंने हड़ताल कर रहे डॉक्टरों को चार घंटे में काम पर वापस आने का अल्टीमेटम दिया। इसने डॉक्टरों में जारी गुस्से को शांत करने की बजाए भड़काने का काम किया। हालांकि शुक्रवार शाम को चीजों में बदलाव देखा गया। तृणमूल कांग्रेस के नेता और मंत्री पार्थ चटर्जी और फिरहाद हाकिम ने बवाल को शांत करने वाले बयान दिए, डॉक्टरों पर हुए हमले की निंदा की और उनसे काम पर लौटने की अपील की।

एक दिन में 700 से ज्यादा डॉक्टरों का पद से इस्तीफा देना मुख्यमंत्री द्वारा गुरुवार को दिए बयान का नतीजा है। दरअसल, उन्होंने एसएसकेएम अस्पताल में डॉक्टरों से कहा था कि यदि वह काम पर नहीं लौटे तो उनपर कार्रवाई की जाएगी। जिसमें हॉस्टलों से निष्कासन शामिल है। इससे डॉक्टरों में हलचल और तेज हो गई और सीनियर उनके समर्थन में खड़े हो गए। गुरुवार को एनआरएस अस्पताल के प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल ने पद से इस्तीफा दिया था। कॉलेज ऑफ मेडिसिन एंड सागोर दत्ता अस्पताल के 21 सीनियर डॉक्टर भी इस्तीफा दे चुके हैं।


शुक्रवार को सबसे पहले आरजी कार मेडिकल कॉलेज के 107 डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया। इसके बाद इस्तीफों का दौर शुरू हो गया। मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के 100, एसएसकेएम के 175, चित्तरंजन नेशनल मेडिकल कॉलेज के 16, एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के 100 और स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के 33 डॉक्टरों से पद से त्यागपत्र दे दिया। जिन लोगों ने इस्तीफा दिया है उसमें सीनियर डॉक्टरों के अलावा विभागाध्यक्ष भी शामिल हैं। मंगलवार से ही राज्य की स्वास्थ्य सेवा चरमरा रखी है। शुक्रवार को भी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद रहीं।
 

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