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बंगालः जीआरपी-RPF ने नाकाम की मानव तस्करी की साजिश; 56 युवतियां रेस्क्यू, दो तस्कर गिरफ्तार

Tue, 22 Jul 2025 10:02 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 22 Jul 2025 10:02 PM IST
सार

जीआरपी और आरपीएफ ने संयुक्त कार्रवाई में 56 युवतियों को मानव तस्करी से बचाया। इन सभी को पटना जा रही कैपिटल एक्सप्रेस ट्रेन से रेस्क्यू किया गया। इस मामले में दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।  

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Bengal: GRP-RPF foiled human trafficking conspiracy; 56 girls rescued
मानव तस्करी

विस्तार

पूर्वोत्तर रेलवे के जीआरपी और आरपीएफ ने उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में मानव तस्करी की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। न्यू जलपाईगुड़ी (एनजेपी) रेलवे स्टेशन पर सोमवार रात एक संयुक्त कार्रवाई में 56 युवतियों को मानव तस्करी से बचाया। इन सभी को पटना जा रही कैपिटल एक्सप्रेस ट्रेन से रेस्क्यू किया गया। इस मामले में दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। जिन लड़कियों को ले जाया जा रहा था, उनकी उम्र 18 से 31 साल के बीच है बताई जा रही है। 

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नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाई जा रही थीं युवतियां
मुताबिक सभी युवतियां पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलीपुरद्वार जिलों की रहने वाली बताई जा रही हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। जानकारी के मुताबिक इन युवतियों से बेंगलुरु की एक कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया था। लेकिन सभी को को ट्रेन से बिहार ले जाया जा रहा था।
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अधिकारियों ने बताया कि जब रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कर्मियों ने इतनी सारी लड़कियों को ट्रेन में एक साथ सफर देखा तो शक हुआ। उन्होंने लड़कियों से टिकट मांगा तो किसी के पास पास टिकट नहीं था। उनके हाथ पर केवल कोच और सीट नंबर की मुहर लगी हुई थी। 
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पुलिस ने लड़कियों को ले जा रही महिला और उसके साथी युवक से पूछताछ की तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। यह कार्रवाई ट्रेन संख्या 13245 डाउन में की गई, जिसमें जीतेन्द्र कुमार पासवान और चंद्रिमा कर नामक दो संदिग्धों को अलग-अलग कोचों से पकड़ा गया। दोनों की पहचान सिलीगुड़ी निवासी के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि वे इन लड़कियों को बेंगलुरु में मोटर पार्ट्स और आईफोन कंपनी में नौकरी दिलाने के लिए ले जा रहे थे। लेकिन जब लड़कियों और उनके माता-पिता से पूछताछ की गई तो पाया गया कि उन्हें झूठे वादों के जरिए बहलाया-फुसलाया गया था। 


उनके पास किसी भी प्रकार का रोजगार दस्तावेज नहीं था, न ही वे अपने यात्रा विवरण के बारे में कुछ जानती थीं। लड़कियों के हाथों पर स्याही से कोच और बर्थ नंबर तक लिखे गए थे। तस्करों के पास से बरामद सामान के साथ दोनों आरोपियों को पुलिस को सौंप दिया गया, और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। सभी 56 युवतियों को आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के बाद सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।

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