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सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने से बंगाल सरकार ने किया इंकार

Fri, 21 Sep 2018 09:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Updated Fri, 21 Sep 2018 09:43 PM IST
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Bengal government declined to celebrate surgical strike day
पश्चिम बंगाल के शैक्षणिक संस्थान 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक डे नहीं मनाएंगे। शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने शुक्रवार को कहा कि इस दिन को सर्जिकल स्ट्राइक डे के तौर पर मनाने का विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का निर्देश भाजपा के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है। इसलिए राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में इसका पालन नहीं किया जाएगा। उन्होंने सेना की छवि धूमिल करने और उसके राजनीतिकरण के लिए भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की भी आलोचना की। उधर, भाजपा ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने केंद्र के हर फैसले का विरोध करने को एक रिवाज बना लिया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि इसमें कोई नई बात नहीं है। बंगाल सरकार पहले भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशों का विरोध कर चुकी है। 
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बता दें कि जम्मू-कश्मीर के उरी में वायुसेना के बेस पर हमले की जवाबी कार्रवाई के तौर पर भारतीय सेना ने 29 सितंबर, 2016 को सीमा पार स्थित आतंकवादियों के सात ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक किया था। उसके बाद सेना ने कहा था कि उसके खास कमांडोज की टीम ने आतंकवादियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। वह लोग वहां से सीमा पार करने का इंतजार कर रहे थे।
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सर्जिकल स्ट्राइक डे भाजपा का राजनीतिक एजेंडा : पार्थ चटर्जी

पार्थ ने कहा कि यह भाजपा का एजेंडा है और वह अगले साल होने वाले आम चुनावों से पहले यूजीसी का इस्तेमाल कर इस एजंडे को आगे बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक बात है कि पार्टी अपने राजनीतिक एजंडे को पूरा करने के लिए यूजीसी का इस्तेमाल कर रही है। हम यूजीसी के उक्त निर्देश का पालन नहीं करेंगे। 

यूजीसी ने इस मौके पर देश भर के तमाम शैक्षणिक संस्थानों को भेजे निर्देश में कहा है कि उस दिन सेना के बलिदान पर पूर्व सैनिकों के भाषण के अलावा एनसीसी के विशेष परेड और प्रदर्शनियों के दौरे का आयोजन करना होगा। चटर्जी ने कहा कि अगर आयोग ने हमारे सैनिकों के बलिदान के नाम पर उक्त दिवस का पालन करने को कहा होता तो बात समझ में आती। सैनिकों और उनके बलिदान के प्रति हमारे मन में पूरा सम्मान है। मंत्री ने कहा कि देश में सेना को हमेशा राजनीति व विवादों से परे रखा गया है। लेकिन भाजपा अब सेना की छवि धूमिल करने और उसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है। यह उचित नहीं है और राज्य सरकार इसका समर्थन नहीं करेगी।
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