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बंगाल चुनाव : TMC के पक्ष में प्रचार करने पर महिला अधिकारी निलंबित, सुरक्षा व्यवस्था में भी पकड़ी गई गड़बड़ी

Fri, 03 Apr 2026 09:13 PM IST
Rahul Kumar पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: Rahul Kumar Updated Fri, 03 Apr 2026 09:13 PM IST
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Bengal Elections Female Official Suspended for Campaigning in Favor of TMC
चुनाव आयोग - फोटो : ANI

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले निर्वाचन आयोग (ईसी) ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। आयोग ने पूर्व बर्धमान जिले के खंडघोष ब्लॉक की जॉइंट बीडीओ और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (एआरओ) ज्योत्सना खातून को निलंबित कर दिया है। उन पर ड्यूटी के दौरान सत्ताधारी टीएमसी के पक्ष में प्रचार करने का गंभीर आरोप है।

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राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) की सिफारिश पर कार्रवाई कर आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शनिवार सुबह 11 बजे तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों के अनुसार ज्योत्सना के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। निलंबन के साथ आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था में एक और बड़ी गड़बड़ी पकड़ी है। 
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 2,185 पुलिसकर्मी 832 टीएमसी कार्यकर्ताओं की निजी सुरक्षा में 

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस द्वारा राज्य में विभिन्न स्तरों पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को निजी सुरक्षा प्रदान करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती का संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य की ओर से दी जाने वाली सुरक्षा के लिए नेताओं के चयन में कथित तौर पर पक्षपातपूर्ण रवैये पर भी चिंता जताई है। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, सत्ताधारी दल के नेताओं को अनुपातहीन रूप से ज्यादा सुरक्षा मिली हुई है।
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आयोग ने यह भी पाया कि चुनावों की घोषणा से पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने 832 ऐसे लोगों को सुरक्षा देने के लिए 2,185 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था, जो सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे। इसके साथ ही, 144 अन्य लोगों को भी सुरक्षा दी गई थी, जिनमें सत्ताधारी दल के समर्थक शामिल थे।सूत्रों ने बताया कि आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और पुलिस महानिदेशक सिद्ध नाथ गुप्ता को निर्देश दिया है कि वे अगले दो से तीन दिनों के भीतर निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से एक सख्त पेशेवर समीक्षा करें।

इससे पहले दिन में आयोग ने पश्चिम बंगाल पुलिस से एक स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। यह रिपोर्ट आयोग के उस पिछले आदेश के पालन के संबंध में थी, जिसमें आपराधिक रिकॉर्ड वाले और दागदार छवि वाले राजनीतिक नेताओं से, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, राज्य द्वारा दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया गया था।

इससे पहले, आयोग ने नेताओं को राज्य की ओर से दी गई सुरक्षा हटाने का निर्देश दिया था, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों। इसमें वे नेता भी शामिल थे जो जमानत या पैरोल पर बाहर हैं, जिन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं, या जिनका आपराधिक इतिहास रहा है।

 

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