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West Bengal: धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों को लेकर CM शुभेंदु सख्त, लिया बड़ा फैसला; जारी किए निर्देश
Thu, 14 May 2026 09:45 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Thu, 14 May 2026 09:45 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर ही राज्य के धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों की आवाज को नियमों के अनुसार ही रखे जाने का निर्देश जारी किया है। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने साफ किया कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन सख्ती से किया जाना चाहिए।
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पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को धार्मिक स्थलों और आयोजनों में तय ध्वनि सीमा से अधिक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों से लंबे समय से आ रही ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक में यह आदेश जारी किया।
राज्य सचिवालय नबन्ना में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन सख्ती से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज तय डेसिबल सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
शिकायत पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश
पिछले कई वर्षों से राज्य के कई इलाकों में लोग त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों से परेशान थे। ये लाउडस्पीकर अक्सर निर्धारित समय सीमा को पार कर जाते थे, जिससे मरीजों, छात्रों और बुजुर्गों को असुविधा होती थी। अब इन शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
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सीएम बोले- ध्वनि प्रदूषण नियमों का कड़ाई से हो पालन
पर्यावरण अधिकारियों द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में दिन के दौरान लाउडस्पीकर के लिए 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल की सीमा तय की गई है। अधिकांश धार्मिक स्थल आवासीय इलाकों में ही स्थित होते हैं। औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में यह सीमा थोड़ी अधिक हो सकती है।
हालांकि, विशेष त्योहारों और अवसरों पर 65 डेसिबल तक की छूट दी जाती रही है। लेकिन अब नई सरकार ध्वनि नियमों के कड़ाई से पालन पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि किसी भी धार्मिक संस्था को अत्यधिक तेज आवाज में लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं करना चाहिए। नियमों के उल्लंघन पर पुलिस को कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
आगामी आयोजनों की होगी विशेष निगरानी
अधिकारियों ने बताया कि आने वाले धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान, जिला पुलिस इकाइयां निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए अपनी निगरानी तेज करेंगी। मुख्यमंत्री के इस कदम से ध्वनि प्रदूषण से होने वाली परेशानियों में कमी आने की उम्मीद है।
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राज्य सचिवालय नबन्ना में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन सख्ती से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज तय डेसिबल सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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शिकायत पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश
पिछले कई वर्षों से राज्य के कई इलाकों में लोग त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों से परेशान थे। ये लाउडस्पीकर अक्सर निर्धारित समय सीमा को पार कर जाते थे, जिससे मरीजों, छात्रों और बुजुर्गों को असुविधा होती थी। अब इन शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
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सीएम बोले- ध्वनि प्रदूषण नियमों का कड़ाई से हो पालन
पर्यावरण अधिकारियों द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में दिन के दौरान लाउडस्पीकर के लिए 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल की सीमा तय की गई है। अधिकांश धार्मिक स्थल आवासीय इलाकों में ही स्थित होते हैं। औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में यह सीमा थोड़ी अधिक हो सकती है।
हालांकि, विशेष त्योहारों और अवसरों पर 65 डेसिबल तक की छूट दी जाती रही है। लेकिन अब नई सरकार ध्वनि नियमों के कड़ाई से पालन पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि किसी भी धार्मिक संस्था को अत्यधिक तेज आवाज में लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं करना चाहिए। नियमों के उल्लंघन पर पुलिस को कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
आगामी आयोजनों की होगी विशेष निगरानी
अधिकारियों ने बताया कि आने वाले धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान, जिला पुलिस इकाइयां निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए अपनी निगरानी तेज करेंगी। मुख्यमंत्री के इस कदम से ध्वनि प्रदूषण से होने वाली परेशानियों में कमी आने की उम्मीद है।