{"_id":"6a1f1c6d07c6a77ddf02a7ac","slug":"bengal-cid-seeks-handwriting-samples-of-trinamool-mlas-in-signature-case-2026-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंगाल: सीआईडी ने टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर के नमूने मांगे, कोर्ट से मिली इजाजत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
बंगाल: सीआईडी ने टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर के नमूने मांगे, कोर्ट से मिली इजाजत
Tue, 02 Jun 2026 11:39 PM IST
निर्मल कांत
आईएएनएस, कोलकाता।
आईएएनएस, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 02 Jun 2026 11:39 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में टीएमसी विधायकों के कथित जाली हस्ताक्षर मामले में सीआईडी ने कोर्ट से कुछ विधायकों के हस्ताक्षर के नमूने लेने की अनुमति मांगी, जिसे मंजूरी मिल गई है। इस मामले की जांच के लिए डीआईजीके नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। पढ़िए रिपोर्ट-
विज्ञापन
फर्जी हस्ताक्षर विवाद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायकों के हस्ताक्षर मामले में अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने कोर्ट का रुख किया है। सीआईडी ने बैंकशाल कोर्ट में तृणमूल विधायकों बहरुल इस्लाम, सुभाषिस दास और अरूप रॉय के हस्ताक्षर के नमूने लेने की अनुमति मांगी, जिसकी अदालत ने मंजूरी दी है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सीआईडी ने इस मामले की जांच के लिए डीआईजी रैंक के अधिकारी की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम बनाई है। राज्य विधानसभा सचिव ने विधानसभा में कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी की शिकायत हरे स्ट्रीट थाने में दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर कोलकाता पुलिस की मदद से सीआईडी जांच कर रही है।
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया। यह घटनाक्रम उस समय हुआ, जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता स्थित नबन्ना में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि विधानसभा हस्ताक्षर फर्जीवाड़े के मामले में शिकायत करने वाले भी यही दोनों विधायक थे। इसके आधार पर विधानसभा सचिवालय ने हरे स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव परिणाम चार मई को घोषित किए गए थे। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष, उपनेता और मुख्य सचेतक के चयन को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सामने जटिल स्थिति पैदा हो गई थी। इसके बाद छह मई को ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर निर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई, जिसमें यह सहमति बनी कि विधानसभा में नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक का निर्णय ममता बनर्जी करेंगी।
ये भी पढ़ें: बंगाल में TMC को बड़ा झटका: बीरभूम कोर कमेटी अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, कई नेता भ्रष्टाचार मामलों में गिरफ्तार
पदों की घोषणा और विवाद
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, नयना बंधोपाध्याय और अशीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक घोषित किया था। अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर से एक पत्र विधानसभा भेजा गया। लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया।
विधानसभा की आपत्ति
विधानसभा की ओर से कहा गया कि संसदीय दल के नेता और पदाधिकारियों का चुनाव संसदीय दल की बैठक में होना चाहिए, जो नहीं किया गया था। 6 मई की बैठक के बाद कई विधायकों ने मीडिया से कहा था कि नेता चुनने का अधिकार ममता बनर्जी को दिया गया है। लेकिन जब विधानसभा अध्यक्ष ने अभिषेक बनर्जी का पत्र खारिज किया, तो 19 मई को कालीघाट में हुई एक और बैठक में विधायकों से पहले बैठक के मिनट्स पर हस्ताक्षर करवाए जाने की बात सामने आई, जिससे विवाद बढ़ गया।
सीआईडी की जांच जारी
सीआईडी ने जांच संभालने के बाद चार विधायकों नयना बंधोपाध्याय, कुणाल घोष, तापस मैती और बहरुल इस्लाम के घर जाकर भी पूछताछ की है। इस मामले में अभिषेक बनर्जी को भी सोमवार को तलब किया गया था। लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पेश होने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
सीआईडी ने इस मामले की जांच के लिए डीआईजी रैंक के अधिकारी की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम बनाई है। राज्य विधानसभा सचिव ने विधानसभा में कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी की शिकायत हरे स्ट्रीट थाने में दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर कोलकाता पुलिस की मदद से सीआईडी जांच कर रही है।
विज्ञापन
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया। यह घटनाक्रम उस समय हुआ, जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता स्थित नबन्ना में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि विधानसभा हस्ताक्षर फर्जीवाड़े के मामले में शिकायत करने वाले भी यही दोनों विधायक थे। इसके आधार पर विधानसभा सचिवालय ने हरे स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव परिणाम चार मई को घोषित किए गए थे। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष, उपनेता और मुख्य सचेतक के चयन को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सामने जटिल स्थिति पैदा हो गई थी। इसके बाद छह मई को ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर निर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई, जिसमें यह सहमति बनी कि विधानसभा में नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक का निर्णय ममता बनर्जी करेंगी।
ये भी पढ़ें: बंगाल में TMC को बड़ा झटका: बीरभूम कोर कमेटी अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, कई नेता भ्रष्टाचार मामलों में गिरफ्तार
पदों की घोषणा और विवाद
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, नयना बंधोपाध्याय और अशीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक घोषित किया था। अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर से एक पत्र विधानसभा भेजा गया। लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया।
विधानसभा की आपत्ति
विधानसभा की ओर से कहा गया कि संसदीय दल के नेता और पदाधिकारियों का चुनाव संसदीय दल की बैठक में होना चाहिए, जो नहीं किया गया था। 6 मई की बैठक के बाद कई विधायकों ने मीडिया से कहा था कि नेता चुनने का अधिकार ममता बनर्जी को दिया गया है। लेकिन जब विधानसभा अध्यक्ष ने अभिषेक बनर्जी का पत्र खारिज किया, तो 19 मई को कालीघाट में हुई एक और बैठक में विधायकों से पहले बैठक के मिनट्स पर हस्ताक्षर करवाए जाने की बात सामने आई, जिससे विवाद बढ़ गया।
सीआईडी की जांच जारी
सीआईडी ने जांच संभालने के बाद चार विधायकों नयना बंधोपाध्याय, कुणाल घोष, तापस मैती और बहरुल इस्लाम के घर जाकर भी पूछताछ की है। इस मामले में अभिषेक बनर्जी को भी सोमवार को तलब किया गया था। लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पेश होने से इनकार कर दिया।