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बीड : पांच बेटियों ने दिया मां को कंधा, छठी बेटी ने बेटा बन पूरी की अंतिम संस्कार की रस्म
Fri, 21 May 2021 07:00 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीड
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 21 May 2021 07:00 PM IST
सार
महाराष्ट्र के बीड की यह खबर समाज को बेटे-बेटी के बीच फर्क नहीं रखने का संदेश देती है। बदलते परिवेश के अनुसार नई परिपाटी शुरू करने के लिए प्रेरित करती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महाराष्ट्र के बीड में मां के निधन के बाद छह बहनों ने मिलकर अपनी जननी की अंत्येष्टि की। उन्होंने परिवार में बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी और बेटे ही मुखाग्नि देते हैं, इस परंपरा को भी तोड़ दिया।
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संकट काल में कोई परंपरा या मर्यादा आड़े नहीं आती, यह जगजाहिर है, जब मौत कोरोना से होती है तो वैसे भी कई स्वजन शव को कंधा देने में भी परहेज करते हैं। ऐसे में बीड़ जिले की शिरूर कासार तहसील के जांब गांव में छह बहनों द्वारा अपनी मां की रस्मो रिवाज से अंत्येष्टि करना प्रशंसनीय कहा जा सकता है। इस परिवार में सिर्फ छह बेटियां हैं।
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जांब गांव की लक्ष्मीबाई रामभाऊ कांबळे की 90 साल की उम्र में गुरुवार को वृद्धावस्था के कारण मृत्यु हो गई। उनके परिवार में छह बेटियां व दामाद हैं। कोई बेटा नहीं होने से सवाल उठे कि कौन अंत्येष्टि करेगा, मुखाग्नि कौन देगा? बेटा नहीं है तो मुखाग्नि के लिए किसे कहा जाए। लक्ष्मीबाई के दामाद अंतिम संस्कार कराने के लिए आगे आए, लेकिन उनकी बेटियों ने मना कर दिया। इसके बाद छहों बहनों ने एक स्वर से तय किया कि अंतिम संस्कार का सारा काम वे ही करेंगी।
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फिर छहों बहनों ने मां को अंतिम यात्रा के लिए सजाया-संवारा। अंतिम यात्रा शुरू हुई तो सभी ने कंधा दिया। यह नजारा देख गांव के लोगों की आंखें भर आईं। जब मुक्तिधाम में जब मुखाग्नि की बारी आई तो उन्हीं में से एक ने यह रस्म भी पूरी कर समाज के सामने मिसाल पेश की।