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BCI: बार काउंसिल ने की केरल हाईकोर्ट के जज की टिप्पणी की निंदा; कानूनी शिक्षा के नियमन पर कही थी यह बात

Mon, 19 Jun 2023 12:21 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केरल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केरल Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 19 Jun 2023 12:21 PM IST
सार

न्यायाधीश मोहम्मद मुस्ताक ने हाल ही में कहा था कि कानूनी शिक्षा में सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि बार काउंसिल के सदस्य कानूनी शिक्षा को निर्धारित करते हैं। साथ ही, ये देश में एलएलबी कोर्स के लिए पाठ्यक्रम तय करते हैं।

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Bar Council condemns remarks of Kerala high court judge on regulation of legal education
केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश मोहम्मद मुस्ताक के बयानों की बीसीआई ने की निंदा। - फोटो : social media

विस्तार

केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश मोहम्मद मुस्ताक ने हाल ही में बीसीआई द्वारा कानूनी शिक्षा के नियमन के बारे में टिप्पणी की थी। इस पर, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने रविवार को एक विज्ञप्ति जारी कर न्यायाधीश के बयानों की निंदा। साथ ही कहा कि न्यायाधीश मुस्ताक को टिप्पणी करने से पहले उचित होमवर्क कर लेना चाहिए था।

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यह है मामला

दरअसल, न्यायाधीश मोहम्मद मुस्ताक ने हाल ही में कहा था कि कानूनी शिक्षा में सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि बार काउंसिल के सदस्य कानूनी शिक्षा को निर्धारित करते हैं। साथ ही, ये देश में एलएलबी कोर्स के लिए पाठ्यक्रम तय करते हैं। उन्होंने कहा था कि बार काउंसिल में ज्यादातर मुकदमेबाजी करने वाले वकील होते हैं और उनका ज्ञान ज्यादातर कानून के मुकदमेबाजी पक्ष तक ही सीमित होता है। यह बार काउंसिल द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम में भी दिखाई देता है।

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दावों का बीसीआई ने किया खंडन

वहीं, बीसीआई ने इन बयानों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश को कुछ स्वार्थी व्यक्तियों द्वारा गुमराह किया गया है। उन्हें उचित जानकारी के बिना किसी भी संगठन के खिलाफ टिप्पणी करने की स्वतंत्रता नहीं है।

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बिना उचित ज्ञान टिप्पणी करने की नहीं आजादी

बीसीआई ने कहा कि हम मुस्ताक की टिप्पणी पढ़कर हैरान हैं। माना मोहम्मद मुस्ताक केरल उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश हैं, लेकिन बार काउंसिल द्वारा कानूनी शिक्षा नियमन के बारे में उन्हें बिना कुछ जाने टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। केवल इसलिए कि वह एक न्यायाधीश है, तब भी उन्हें उचित ज्ञान के बिना किसी के खिलाफ कोई टिप्पणी करने की स्वतंत्रता नहीं है।

कानूनी शिक्षा से जुड़े मामलों के लिए एक अलग समिति

बीसीआई ने कहा कि बार काउंसिल के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने कानूनी शिक्षा से जुड़े मामलों से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है और उस समिति के केवल पांच सदस्य निर्वाचित सदस्य हैं। इस समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश कर रहे हैं। वहीं, इसके सह अध्यक्ष के रूप में उच्च न्यायालयों के दो वर्तमान मुख्य न्यायाधीश हैं। इसके अलावा, उच्च न्यायालयों के दो पूर्व मुख्य न्यायाधीश और 11 प्रसिद्ध शिक्षाविद हैं, जिनमें देश के कुछ प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अलावा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालयों के डीन और अन्य सरकारी और निजी कानून विश्वविद्यालय इसके सदस्य हैं। 

कानूनी शिक्षा की नीतियां और मानदंड इस उच्च स्तरीय समिति द्वारा ही तय किए जाते हैं। बीसीआई ने कहा कि माननीय न्यायाधीश को पता होना चाहिए कि बार काउंसिल की कानूनी शिक्षा समिति में केवल 5 निर्वाचित सदस्य हैं। भारत में कानूनी शिक्षा का स्तर किसी से पीछे नहीं है और केवल हीन भावना से पीड़ित लोग ही इस तरह के गैर जिम्मेदाराना बयान देते हैं।

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