बैंक हड़ताल: राहुल बोले- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बेचना देश की वित्तीय सुरक्षा के साथ समझौता होगा
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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कई सरकारी बैंकों के कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर मंगलवार को सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सांठगांठ वाले पूंजीपतियों (क्रोनी) के हाथों में बेचना देश की वित्तीय सुरक्षा के साथ समझौता होगा।
उन्होंने हड़ताल करने वाले बैंक कर्मचारियों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए यह दावा भी किया कि सरकार लाभ का निजीकरण और नुकसान का राष्ट्रीयकरण कर रही है।
कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया, ‘केंद्र सरकार लाभ का निजीकरण और नुकसान का राष्ट्रीयकरण कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को क्रोनी के हाथों में बेचना भारत की वित्तीय सुरक्षा के साथ समझौता होगा।’
बता दें कि कि सार्वजनिक क्षेत्र के दो और बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में बैंककर्मी हड़ताल पर हैं। हड़ताल के चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नकदी निकासी, जमा, चेक समाशोधन और कारोबारी लेनदेन प्रभावित हुआ।
नौ यूनियनों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) ने 15 और 16 मार्च को हड़ताल का आह्वान किया है। यूनियन का दावा है कि करीब 10 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में शामिल हैं।
GOI is privatising profit & nationalising loss.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 16, 202
Selling PSBs to Modicronies gravely compromises India’s financial security.
I stand in solidarity with the striking bank employees.#BankStrike
बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का मुद्दा राज्यसभा में गूंजा
वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल का मुद्दा मंगलवार को संसद में गूंजा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाते हुए समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बयान देने की मांग की।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए खड़गे ने कहा कि कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से बैंकों का कामकाज ठप पड़ गया है और आम जनता से लेकर कोराबारी तक इससे परेशान हैं।
उन्होंने कहा, ‘देश भर में लगभग 12 राष्ट्रीयकृत बैंक हैं और इनकी एक लाख शाखाएं हैं। इनमें करीब 13 लाख लोग काम करते हैं और 75 करोड़ से ज्यादा खातेदार हैं। ये खातेदार भी बैंक के हितधारक हैं और उनके पूछे बगैर सरकार ने निजीकरण का फैसला कर लिया।’
वरिष्ठ कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा कि वर्ष 2008 में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट आया था तब राष्ट्रीयकृत बैंकों के कारण ही भारत की अर्थव्यवस्था संभली थी। उन्होंने कहा कि आज बैंक कर्मचारी रास्तों पर बैठे हैं। हड़ताल कर रहे हैं। उनकी समस्या को सुलझाने के लिए वित्त मंत्री को यहां बयान देना चाहिए।