फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bank at risk from IL & FS crisis, Earning of common people at stake

आईएल एंड एफएस संकट से जोखिम में बैंक, दांव पर आम लोगों की कमाई

Tue, 02 Oct 2018 04:32 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 02 Oct 2018 04:32 AM IST
विज्ञापन
Bank at risk from IL & FS crisis, Earning of common people at stake

इंफ्रास्ट्रक्टर निवेश से जुड़ी सरकारी क्षेत्र की कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएल एंड एफएस) अपने कर्जों की किस्त नहीं चुका पा रही है। इसके चलते न केवल कई बड़े बैंक संकट में पड़ गए हैं बल्कि प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड में पैसा लगाने वाले आम लोगों की मेहनत की कमाई भी दांव पर लगी है। इसके संकटग्रस्त होने के कारण हाल ही में शेयर मार्केट में काफी गिरावट देखने को मिली। 15 सितंबर से 24 सितंबर के बीच सेंसेक्स 1785 अंक गिर गया। 21 सितंबर को सेंसेक्स एक समय 1000 से भी ज्यादा अंक नीचे गिर गया था।

विज्ञापन


यह भी पढ़ें : अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए सरकार ने आईएल एंड एफएस को नियंत्रण में लिया
विज्ञापन


169 कंपनियों का समूह है आईएल एंड एफएस

2017-18 के आंकड़ों के अनुसार, आईएल एंड एफएस समूह में 169 कंपनियां हैं। इनमें आईएल एंड एफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क्स, आईएल एंड एफएस फाइनेंशियल सर्विस लिमिटेड और गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी कंपनी लिमिटेड आदि शामिल हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की सबसे अधिक हिस्सेदारी
आईएल एंड एफएस पर कुल 90,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी सरकारी कंपनियों की है। इसमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की हिस्सेदारी 50.5 फीसदी है। यूटीआई की हिस्सेदारी 30.5 फीसदी है। एलआईसी की हिस्सेदारी 26.01 फीसदी, जापान की ओरिक्स कॉरपोरेशन 23.54 फीसदी, अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी की 12.5 फीसदी, एचडीएफसी की 9.02 फीसदी और भारतीय स्टेट बैंक की 6.42 हिस्सेदारी फीसद है। 

क्या 1987, 2005 और 2006 में भी हुए थे घोटाले : जेटली

Bank at risk from IL & FS crisis, Earning of common people at stake
अरुण जेटली (फाइल फोटो)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार की आईएल एंड एफएस को राहत पहुंचाने की कोशिशों के बीच कांग्रेस ने गलत खबरें फैलानी शुरू कर दी है। राहुल गांधी कहते हैं कि किसी भी वित्तीय संस्थान में निवेश ‘एक घोटाला’ है। क्या 1987 में घोटाला हुआ था, जब आईएलएंडएफएस को 50.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने प्रमोट किया और यूटीआई की इसमें 30.5 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। क्या 2005 में घोटाला हुआ था, जब एलआईसी ने कंपनी में 15 प्रतिशत और 2006 में 11.10 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी हासिल की।

बनी रहती है कर्जदारों की देनदारी
वित्त मंत्री ने कहा कि कर्ज को बट्टा खाते में डालने की कार्रवाई कर लाभ और पूंजी के अधिकतम इस्तेमाल के लिए की जाती है। इसके बाद भी कर्जदारों की देनदारी कायम रहती है। कर्ज वसूली लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए प्रतिभूतिकरण व वित्तीय संपत्तियों का पुनर्गठन और प्रतिभूति हित कानून व कर्ज वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) की व्यवस्था है। सरकारी बैंकों के लिए 2018-19 में वसूली लक्ष्य 1,81,034 करोड़ रुपये है।
 

विरासत में मिली एनपीए की समस्या

Bank at risk from IL & FS crisis, Earning of common people at stake

मार्च, 2018 के मुकाबले जून, 2018 में समाप्त तिमाही के दौरान एनपीए 21,000 करोड़ रुपये घटे हैं। जेटली ने कहा कि 2014 में जब भाजपा सत्ता में आई तो उसे एनपीए की समस्या विरासत में मिली थी। सरकारी बैंकों ने 2008 से 2014 के दौरान बहुत ज्यादा कर्ज बांटे। मार्च, 2008 में सरकारी बैंकों का कुल बकाया कर्ज 18 लाख करोड़ रुपये था, जो मार्च, 2014 तक बढ़कर 52 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

एनपीए की पारदर्शी तरीके से पहचान की
जेटली ने कहा कि मोदी सरकार ने दबाव वाले कर्ज खातों और एनपीए की पारदर्शी तरीके से पहचान की। पहले उस पर पर्दा डाला जा रहा था। रिजर्व बैंक ने 2015 में संपत्ति की गुणवत्ता की समीक्षा शुरू की। इसके बाद बैंकों के पारदर्शी तरीके से पहचान करने से पता चलता कि फंसे कर्ज का स्तर बहुत ऊंचा है। सरकारी बैंकों का फंसा कर्ज मार्च, 2014 के 2.26 लाख करोड़ रुपये से मार्च, 2018 तक 8.96 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed