तमिलनाडु: महंत को पालकी में लेकर जाने की परंपरा 'पट्टिना प्रवेशम' पर रोक, स्टालिन सरकार का विरोध शुरू
मयीलादुथुरई जिले के राजस्व अधिकारियों ने संविधान के अनुच्छेद 23 का हवाला देते हुए निषेधाज्ञा जारी कर दी है और कहा कि पट्टिना प्रवेश कार्यक्रम के आयोजन को अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि लोगों से पालकी ढोने को कहा जाता है।
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तमिलनाडु के मयीलादुथुरई जिले के राजस्व अधिकारियों की ओर से लिए गए सदियों पुरानी पट्टिना प्रवेशम परंपरा पर प्रतिबंध लगाने का फैसला जारी किया था। जिसके बाद यहां बड़ा विवाद शुरू हो गया है। इस परंपरा में महंत को अनुयायियों द्वारा पालकी में ले जाया जाता है। कार्यक्रम मई के अंत में होना है।
वैष्णव गुरु मन्नारगुडी श्री सेंदलंगरा जीयार ने बुधवार को तहा कि पट्टिना प्रवेशन एक धार्मिक परंपरा है। किसी को इसे रोकने का अधिकार नहीं है। इसे मठ के अनुयायी करते हैं। एक मन्नारगुडी जीयार होने के नाते मैं इन धर्मद्रोही और देशद्रोही लोगों को इनके हिंदू विरोधी कार्यों को लेकर चेतावनी देता हूं।
वहीं, मदुरै अधीनम के प्रमुख श्री हरिहर श्री ज्ञानसंबंद देसिका स्वामीगल ने कहा कि जब मैंने धार्मिक कर्तव्य पूरे करने के लिए अधीनम लैंड, मंदिरों और अन्य व्यावसायिक संपत्तियों की वापसी के लिए कहा तो सरकार ने मुझे धमकी दी। सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों ने अधीनम की कई संपत्तियां कब्जा रखी हैं।
इससे पहले मंगलवार को उन्होंने कहा था कि धरमापुरम अधीनम का शैव संप्रदाय के लोगों के लिए वही महत्व है जो कैथोलिक ईसाइयों के लिए वेटिकन सिटी का है। इस प्राचीन शैव मठ की परंपरा का सम्मान हो चाहिए, न कि विरोध। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम लोगों की अपने गुरु के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
वार्षिक रूप से होने वाली पट्टिना प्रवेशम शोभायात्रा पर रोक लगाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को इसमें दखल देना चाहिए। यह कार्यक्रम सदियों से होता आ रहा है। इसे ब्रिटिश राज के दौरान और देश की आजादी के बाद सभी मुख्यमंत्रियों ने भी अनुमति दी थी।
500 करोड़ की लागत से मंदिरों के जीर्णोद्धार करेगी राज्य सरकार
तमिलनाडु सरकार 500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से राज्य भर में 1,000 मंदिरों के संरक्षण, मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य करेगी, इसके अलावा चेन्नई के कपालेश्वर मंदिर में एक विशाल सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किया जाएगा।
हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के मंत्री पी के शेखरबाबू ने बुधवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक केंद्र में आध्यात्मिक विषयों पर पुस्तकों और ग्रंथों का एक पुस्तकालय, एक छोटा सभागार, एक पुस्तक स्टाल और मंदिर में एक प्रकाशन केंद्र होगा।
शेखरबाबू ने अपने विभाग के लिए अनुदान की मांग को लेकर चल रही बहस पर विराम लगाते हुए कहा कि 1,000 साल से अधिक पुराने कुल 80 मंदिरों में 100 करोड़ रुपये की लागत से संरक्षण, जीर्णोद्धार और नवीनीकरण का कार्य किया जाएगा।
मंत्री द्वारा आज की गई 165 घोषणाओं में दिन भर संचालित होने वाली 'अन्नधनम्' (मुफ्त भोजन) योजना का विस्तार भी शामिल हैं। वर्तमान में यह योजना 754 मंदिरों में संचालित की जा रही है और अब 10 और मंदिरों में इसे संचालित किया जाएगा।