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कोर्ट की कार्यवाही से कमाई पर रोक: SC बोला- अदालत कोई एंटरटेनमेंट चैनल नहीं, मेटा और एक्स को भेजा नोटिस

Sat, 25 Jul 2026 05:03 AM IST
प्रशांत तिवारी अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 25 Jul 2026 05:03 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो के दुरुपयोग पर रोक लगाते हुए बिना अनुमति रिकॉर्डिंग निकालने, एडिट करने, सोशल मीडिया पर पोस्ट करने और उससे कमाई करने पर अंतरिम प्रतिबंध लगा दिया है। अदालत ने कहा कि कोर्ट मनोरंजन का मंच नहीं है। साथ ही केंद्र सरकार, मेटा, एक्स और सभी हाईकोर्ट से इस संबंध में जवाब और रिपोर्ट भी तलब की गई है।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कोर्ट की कार्यवाही की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को संबंधित अदालत की पूर्व अनुमति के बिना निकालना, संपादित (एडिट) करना, सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करना, दोबारा पोस्ट करना, अपलोड करना या उससे कमाई (मॉनेटाइजेशन) करना प्रतिबंधित रहेगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने इतना सख्त रुख क्यों अपनाया?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत किसी भी सूरत में मनोरंजन का माध्यम या 24×7 एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बन सकती। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश का न्यायिक कार्यवाही की समाचार रिपोर्टिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पत्रकार हर्षिता ग्रोवर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
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याचिका में क्या मांग की गई थी?
याचिका में अदालत की कार्यवाही के वीडियो क्लिप काटकर, उन्हें संदर्भ से अलग करके और भ्रामक तरीके से सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि अदालत 24×7 एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बन सकती।
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केंद्र सरकार और हाईकोर्ट को क्या निर्देश दिए गए?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूछा कि याचिका में मांगी गई राहतों को लागू करने के लिए कौन-सा मंत्रालय नोडल एजेंसी की भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही सभी हाईकोर्ट से भी लाइव-स्ट्रीमिंग संबंधी मॉडल गाइडलाइन अपनाने और उसके प्रभाव पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।


ये भी पढ़ें: मणिपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बोला- रोज हो सुनवाई, विशेष अदालतें गठित करें सरकार

एआई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता क्यों जताई?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से अदालत की रिकॉर्डिंग में जजों और वकीलों की आवाज तथा उनके शब्दों से छेड़छाड़ कर भ्रामक वीडियो तैयार किए जा सकते हैं। इससे न्यायपालिका की छवि और आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने भी सहमति जताते हुए कहा कि अदालत की कार्यवाही को तोड़-मरोड़कर पेश करना और गलत सूचना फैलाना गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

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