केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईपीएस आईजी-डीआईजी की प्रतिनियुक्ति पर लगी रोक हटी
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कॉडर अफसरों और आईपीएस अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद में सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना अहम फैसला सुनाया है। इसमें कहा गया है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईपीएस आईजी-डीआईजी की प्रतिनियुक्ति पर लगी रोक अब हटा दी गई है। अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से यह भी कहा है कि वह डीओपीटी के नियमानुसार 30 जून 2021 तक केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में कॉडर रिव्यू प्रक्रिया पूरी करे।
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बता दें कि 18 नवंबर 2019 को जस्टिस एस मुरलीधर और तलवंत सिंह की बेंच ने कॉडर अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए आईटीबीपी में डीआईजी और आईजी के पदों को आईपीएस की प्रतिनियुक्ति के जरिए भरने पर रोक लगा दी थी। यह रोक सीआरपीएफ, बीएसएफ और सीआईएसएफ में भी लागू हो गई। अदालत ने उस वक्त यह भी कहा था कि सरकार इन बलों में डीआईजी या उससे ऊपर के पदों पर प्रतिनियुक्ति के जरिए आईपीएस अधिकारी लगाती है तो उसके लिए अदालत को सूचित करना होगा।
सबसे पहले कॉडर विवाद के चलते आईटीबीपी अधिकारियों की ओर से याचिका लगाई गई थी। इसके बाद सीआईएसएफ के 383 कॉडर अधिकारी अदालत पहुंच गए। इसी तरह सीआरपीएफ और बीएसएफ के भी 160 से अधिक कॉडर अफसरों ने न्यायालय की शरण ली। इन अधिकारियों की दलील थी कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईपीएस की प्रतिनियुक्ति पर बैन लगाया जाए।
अदालत ने सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी और सीआईएसएफ की याचिकाओं को संयुक्त मानकर इस मामले की सुनवाई शुरू की थी। मौजूदा समय में केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स 'सीएपीएफ' में डीआईजी के करीब 20-25 फीसदी पर, आईजी स्तर पर 50 प्रतिशत और एडीजी स्तर के 75 फीसदी से अधिक पदों पर आईपीएस तैनात हैं।अदालत के बैन के चलते कॉडर रिव्यू का यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है।
इस मामले में अनेक आईपीएस अधिकारी भी यह कह कर पार्टी बन गए थे कि वे अर्धसैनिक बलों में प्रतिनियुक्ति पर आना चाहते हैं। अदालत ने अब इस मामले पर भी सुनवाई की थी। हालांकि तब अदालत ने कह दिया था कि मामला निपटने तक किसी भी अर्धसैनिक बल में आईपीएस अधिकारी बतौर आईजी प्रतिनियुक्ति पर नहीं आ सकेंगे। डीआईजी के पदों पर भी कोर्ट का आदेश लागू होगा। मौजूदा समय में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी में आईपीएस डीआईजी और आईपीएस आईजी के 125 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं।
आईपीएस की प्रतिनियुक्ति पर लगा स्टे हटवाने के लिए दिया था ये तर्क
इससे पहले जब मामले की सुनवाई हुई तो सरकारी पक्ष ने अर्धसैनिक बलों में प्रतिनियुक्ति पर आईपीएस अधिकारियों को उनके कोटे के पदों पर लगाने के लिए प्रतिबंध हटाने का आग्रह किया था। सरकारी पक्ष का कहना था कि मामले की सुनवाई चलती रहे, लेकिन प्रतिनियुक्ति की इजाजत दे दी जाए। अदालत ने कहा, इतनी जल्दी क्यों है। क्या कोई इमरजेंसी है। इस पर आईपीएस अधिकारियों का कहना था कि वे इन बलों में काम करना चाहते हैं। उनके पास पर्याप्त अनुभव है।
दूसरी ओर कॉडर अफसरों का आरोप है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने खुद सामने न आकर कथित तौर पर कुछ आईपीएस अधिकारियों को सामने कर दिया है। यदि आईपीएस की जगह इन बलों के सौ कमांडेंट को प्रमोशन देकर उन्हें डीआईजी बना दिया जाए तो ये सभी पद भरे जा सकते हैं। ऐसे में जब कमांडेंट डीआईजी बनेंगे तो इतने ही टूआईसी कमांडेंट बन जाएंगे। इसके बाद उतने ही डिप्टी कमांडेंट टूआईसी बन जाएंगे।
इसी तरह 108 सहायक कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट के पद पर तैनात किए जा सकेंगे। सीआरपीएफ के पूर्व आईजी एसएस संधू और वीपीएस पंवार कहते हैं कि इस मामले में केंद्र सरकार टालमटोल की नीति पर चल रही है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के करीब दस हजार मौजूदा अफसर और सैकड़ों पूर्व अफसर प्रमोशन एवं वित्तीय फायदों में हुए भेदभाव को लेकर परेशान हैं। जिस तरह से केंद्र सरकार की दूसरी संगठित सेवाओं में एक तय समय के बाद रैंक या फिर उसके समकक्ष वेतन मिलता है, वैसा सभी केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारियों को नहीं मिल पा रहा है।
करीब बीस साल की सेवा के बाद आईपीएस अधिकारी आईजी बन जाता है, लेकिन कॉडर अफसर उस वक्त कमांडेंट के पद तक पहुंच पाता है। कॉडर अफसर 34-35 साल की नौकरी के बाद बड़ी मुश्किल से आईजी बनता है। डीओपीटी ने 2008-09 के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों में ओजीएएस यानी 'ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस' के तहत सेवा नियम बनाने के आदेश जारी किए थे। अभी तक सीआरपीएफ, बीएसएफ और दूसरी कई सेवाओं में सर्विस रूल नहीं बनाए गए हैं।
इतना ही नहीं, इन कॉडर अधिकारियों को समय पर गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (एनएफएफयू) और गैर-कार्यात्मक चयन ग्रेड (एनएफएसयू) का लाभ मिल जाए, इसके लिए आरआर यानी रिक्रूटमेंट रूल में भी संशोधन नहीं किया गया। नतीजा, आज बहुत से कॉडर अधिकारी परमोशन और आर्थिक फायदों से वंचित हैं। यही वजह है कि देश के पांच बड़े अर्धसैनिक बलों के अफसर अदालत में पहुंच गए हैं।