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टीके की सुरक्षा और इम्युनोजेनिसिटी आंकड़ों के आधार पर सीमित इस्तेमाल पर किया गया विचार: बलराम भार्गव
Wed, 06 Jan 2021 12:12 AM IST
Kuldeep Singh
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 06 Jan 2021 12:12 AM IST
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आईसीएमआर के डीजी बलराम भार्गव
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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के प्रमुख बलराम भार्गव ने मंगलवार को कहा कि महामारी के हालात में कोविड टीकों के सीमित आपात इस्तेमाल पर विचार टीके की सुरक्षा और ‘इम्युनोजेनिसिटी’ आंकड़ों के आधार पर किया गया। वहीं तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण इस समय चल रहा है।
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ऑक्सफोर्ड के कोविड-19 टीके और स्वदेश विकसित कोवैक्सीन को मंजूरी देने में अपनाई गयी प्रक्रिया की व्याख्या करते हुए भार्गव ने कहा, सीडीएससीओ की कोविड-19 संबंधी विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने इन टीकों को त्वरित मंजूरी देने के लिए मौजूदा महामारी के हालात, अधिक मृत्युदर, उपलब्ध विज्ञान और निर्धारित उपचार पद्धतियों के अभाव पर विचार किया और यह हमारे कानूनी प्रावधान में है।
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भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने रविवार को कोविशील्ड और कोवैक्सीन टीकों के सीमित आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। कुछ विपक्षी दलों के नेताओं और विशेषज्ञों ने कोवैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण के आंकड़े नहीं होने पर चिंता प्रकट की है। उनका कहना है कि प्रक्रिया को छोड़ने और समय पूर्व मंजूरी देने से लोगों को खतरा हो सकता है।
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भार्गव ने कहा, महामारी के हालात में सीमित इस्तेमाल पर विचार सुरक्षा और इम्युनोजेनिसिटी के आंकड़ों के आधार पर किया गया है वहीं तीसरे चरण का क्लिनिकल परीक्षण अब भी चल रहा है। इम्युनोजेनिसिटी आंकड़े दूसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षण के माध्यम से प्राप्त आंकड़े हैं। क्लिनिकल परीक्षण नियम, 2019 में दूसरे चरण के परिणामों को मंजूरी के लिए दिशानिर्देशों के लिहाज से विचार करने का प्रावधान है।
भार्गव ने कहा, अब एसईसी आपात स्थिति में सीमित इस्तेमाल के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया में डीसीजीआई की सहायता कर रही है। अब हमारे पास दो टीके हैं।आईसीएमआर प्रमुख ने कोविशील्ड के ब्रिटेन में हुए अध्ययनों का ब्योरा देते हुए कहा कि पशुओं पर हुए अध्ययन दिखाते हैं कि टीके ने बंदरों में सार्स-सीओवी-2 निमोनिया को रोका और चूहों में भी इसके इम्युनोजेनिसिटी संबंधी आंकड़े सकारात्मक रहे।