{"_id":"5834754d4f1c1b2b2513b340","slug":"balamuralikrishna-veteran-carnatic-musician-dies-aged-86","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं रहे कर्नाटक संगीत के लीजेंड बालमुरलीकृष्णन ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
नहीं रहे कर्नाटक संगीत के लीजेंड बालमुरलीकृष्णन
एजेंसी
Updated Tue, 22 Nov 2016 10:12 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटोः बालमुरलीकृष्णन
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कर्नाटक संगीत के महान गायक एम बालमुरलीकृष्णन का मंगलवार को चेन्नई में निधन हो गया। बालमुरलीकृष्णन 86 साल के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को उन्होंने अपने निवास पर अंतिम सांस ली।
मंगलमपल्ली बालमुरलीकृष्ण ने अस्सी के दशक में राष्ट्रीय एकता के लिए दूरदर्शन के बनाए गाने ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ में अपनी आवाज दी थी। इस गाने से पूरे देश ने उनकी विलक्षण गायन प्रतिभा का लुत्फ लिया था।
बालमुरलीकृष्णन ने अपनी संगीत यात्रा छह साल की उम्र में ही शुरू कर दी थी और आगे चल कर उन्होंने गायन के क्षेत्र में ऊंचा शिखर छुआ। कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत दोनों जगह उन्होंने अपनी धाक जमाई।
विज्ञापन
बहुमुखी प्रतिभा के धनी बालमुरलीकृष्णन ने सिर्फ अपनी आवाज बल्कि संगीत रचना से भी लोगों को चमत्कृत किया। उन्होंने तेलुगु, संस्कृत, कन्नड़ और तमिल के 400 गानों का संगीत रचा।
कर्नाटक संगीत के इस लीजेंड ने हिन्दुस्तानी गायिकी के दिग्गजों के साथ भी मशहूर जुगलबंदियां कीं। इनमें पंडित भीमसेन जोशी, किशोरी अमोनकर, हरिप्रसाद चौरसिया, पंडित जसराज और जाकिर हुसैन शामिल हैं। बालमुरलीकृष्ण ने रवींद्र संगीत भी गाया।
विज्ञापन
मंगलमपल्ली बालमुरलीकृष्ण ने अस्सी के दशक में राष्ट्रीय एकता के लिए दूरदर्शन के बनाए गाने ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ में अपनी आवाज दी थी। इस गाने से पूरे देश ने उनकी विलक्षण गायन प्रतिभा का लुत्फ लिया था।
विज्ञापन
बालमुरलीकृष्णन ने अपनी संगीत यात्रा छह साल की उम्र में ही शुरू कर दी थी और आगे चल कर उन्होंने गायन के क्षेत्र में ऊंचा शिखर छुआ। कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत दोनों जगह उन्होंने अपनी धाक जमाई।
विज्ञापन
बहुमुखी प्रतिभा के धनी बालमुरलीकृष्णन ने सिर्फ अपनी आवाज बल्कि संगीत रचना से भी लोगों को चमत्कृत किया। उन्होंने तेलुगु, संस्कृत, कन्नड़ और तमिल के 400 गानों का संगीत रचा।
कर्नाटक संगीत के इस लीजेंड ने हिन्दुस्तानी गायिकी के दिग्गजों के साथ भी मशहूर जुगलबंदियां कीं। इनमें पंडित भीमसेन जोशी, किशोरी अमोनकर, हरिप्रसाद चौरसिया, पंडित जसराज और जाकिर हुसैन शामिल हैं। बालमुरलीकृष्ण ने रवींद्र संगीत भी गाया।