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Badlapur Case: बच्चियों से दरिंदगी, उग्र विरोध और आरोपी के एनकाउंटर पर कोर्ट के सवाल, 'बदला'पुर की पूरी कहानी

Wed, 25 Sep 2024 06:58 PM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 25 Sep 2024 06:58 PM IST
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सार
Badlapur Case: अगस्त में महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर में दो स्कूली बच्चियों के यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई थी। यौन उत्पीड़न के आरोप में स्कूल के सफाईकर्मी अक्षय शिंदे को गिरफ्तार किया गया था, जिसकी सोमवार को पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई। अक्षय के परिजन ने एनकाउंटर पर सवाल खड़े किए और अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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badlapur case accused akshay shinde encounter to high court timeline news in hindi
महाराष्ट्र का बदलापुर कांड - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

महाराष्ट्र का बदलापुर कांड इन दिनों फिर चर्चा में है। बदलापुर कांड के आरोपी अक्षय शिंदे के एनकाउंटर पर बंबई उच्च न्यायालय ने पुलिस पर सवाल खड़े किए हैं। अक्षय सोमवार को पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। बीते अगस्त में एक स्कूल में बच्चियों का यौन शोषण करने का मामला सामने आया था। इस घिनौनी करतूत में स्कूल का सफाईकर्मी अक्षय शिंदे आरोपी था।  


आइये जानते हैं कि महाराष्ट्र के बदलापुर की घटना क्या है? घटना का खुलासा कैसे हुआ? पुलिस ने मामले में क्या-क्या कार्रवाई की है? आरोपी का एनकाउंटर कैसे हुआ? अदालत में क्या हुआ है? 


पहले जानते हैं कि अभी कोर्ट में क्या हुआ है?
बदलापुर कांड के आरोपी के अक्षय शिंदे के एनकाउंटर के चलते यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। अक्षय पर स्कूल बच्चियों का यौन शोषण के साथ ही अपनी पूर्व पत्नी के भी यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज था। पूर्व पत्नी के यौन उत्पीड़न के मामले में ही पुलिस उसे जांच के लिए तलोजा जेल से बदलापुर लेकर गई थी। सरकार का कहना है कि सोमवार को जांच के बाद जेल लौटते समय अक्षय ने एक पुलिस अधिकारी की रिवॉल्वर छीनकर पुलिसकर्मियों पर कथित तौर पर तीन गोलियां चलाईं। जिनमें से एक गोली असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर संजय शिंदे की जांघ में लगी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अक्षय के सिर में गोली लगी और उसकी मौत हो गई।  

आरोपी अक्षय के परिजन ने पुलिस एनकाउंटर पर सवाल खड़े किए और अदालत का दरवाजा खटखटाया। अक्षय के पिता ने मुठभेड़ की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग करते हुए बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। बुधवार (25 सितंबर) को न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने अक्षय के पिता की याचिका पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान बंबई उच्च न्यायालय ने अक्षय शिंदे की मौत के लिए महाराष्ट्र पुलिस से कड़े सवाल दागे। अदालत ने पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाया कि आरोपी ने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीन लिया था, जिसके कारण पुलिसकर्मियों ने उस पर गोली चला दी।

बंबई उच्च न्यायालय
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : ANI
अदालत ने क्या-क्या सवाल किए?
अदालत ने सरकारी वकील से कहा कि सामान्यतः ऐसी परिस्थितियों में आरोपी को घुटने के नीचे गोली मार दी जानी चाहिए। अदालत ने पुलिस से सवाल किया, 'हम कैसे मान लें कि फायरिंग में प्रशिक्षित पुलिस आरोपी को काबू नहीं कर सकी?'

अदालत में इस बात पर जोर दिया गया कि पुलिसकर्मी अक्षय पर काबू पा सकते थे, इसलिए पुलिस का मुठभेड़ का दावा संदिग्ध लगता है। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'इसे मुठभेड़ नहीं कहा जा सकता... यह मुठभेड़ नहीं है।' उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि पुलिस को यह पता लगाना होगा कि क्या शिंदे ने पहले कभी बंदूक का इस्तेमाल किया था।

बुधवार को सुनवाई के दौरान अक्षय के पिता के वकील ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने और मामले से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की। अदालत ने पुलिस से भी विस्तार से घटना की जानकारी ली। अदालत ने पूछा कि क्या घटनास्थल से छेड़छाड़ रोकने के लिए इसे सील कर दिया गया था? क्या हथियार पिस्तौल था या रिवॉल्वर? 

पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया गया कि आरोपी अक्षय के बैरक से बाहर निकलने और फिर वैन में बैठते समय की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि जिस दिन अक्षय का परिवार उससे मिलने आया था, उस दिन की सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित रखी जानी चाहिए।

अदालत ने जांच सीआईडी को सौंपने में देरी के लिए पुलिस की भी खिंचाई की। अदालत ने कहा कि घटना से जुड़े सभी पांच व्यक्तियों, यानि चार पुलिसकर्मियों और आरोपी शिंदे के कॉल डेटा रिकॉर्ड भी जुटाए जाने चाहिए। पीठ ने कहा कि वह निष्पक्ष जांच चाहती है, भले ही इसमें पुलिस शामिल हो। अब मामले की अगली सुनवाई 3 अक्तूबर को होगी।

बदलापुर केस
बदलापुर केस - फोटो : PTI
महाराष्ट्र के बदलापुर की घटना क्या है?
पिछले महीने बदलापुर पूर्व के एक नामी स्कूल में दो बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटना ने पूरे इलाके में रोष व्याप्त कर दिया। बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप स्कूल टॉयलेट साफ करने वाले व्यक्ति अक्षय शिंदे पर लगा। चार और छह साल की बच्चियों के साथ यह घटना 12 और 13 अगस्त को घटी थी। 

दरअसल, आरोपी अक्षय शिंदे को 1 अगस्त को टॉयलेट साफ करने के लिए अनुबंध के आधार पर स्कूल में भर्ती किया गया था। स्कूल ने लड़कियों के शौचालयों की सफाई के लिए कोई महिला कर्मचारी नियुक्त नहीं की थी। इसका फायदा उठाते हुए आरोपी ने 12 और 13 अगस्त की कक्षाओं के दौरान बच्चियों का यौन उत्पीड़न किया। 

बदलापुर मामला
बदलापुर मामला - फोटो : PTI
बच्ची लगातार अपने माता-पिता से शिकायत करती रही
14 अगस्त को एक बच्ची ने स्कूल से घर लौटने के बाद अपने माता-पिता से गुप्तांगों में दर्द की शिकायत की। बच्ची लगातार अपने माता-पिता से शिकायत करती रही तो माता-पिता को शक हुआ। उन्होंने लड़की से पूछताछ की तो घटना का पूरा सच पता चला। जब वह टॉयलेट गई तो पता चला कि अक्षय शिंदे नाम के 23 वर्षीय सफाईकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ था।

चिंतित माता-पिता ने उसी कक्षा की एक अन्य लड़की के माता-पिता से संपर्क किया तो उन्होंने भी कहा कि उनकी बेटी कुछ दिनों से स्कूल जाने से डर रही है। दोनों बच्चियों की हालत संदिग्ध होने पर माता-पिता ने तुरंत स्थानीय डॉक्टर से जांच कराया। उसमें बाद पता चला कि आरोपी ने बच्चियों का यौन शोषण किया था। 

हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज किया गया
इसके बाद दोनों के परिजन ने 16-17 अगस्त की आधी रात करीब 12:30 बजे स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने गए। हालांकि, अभिभावकों का आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी शुभदा शितोले ने उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें कुछ घंटों तक बैठाए रखा और कहा कि वे सभी घटनाओं की जांच कर रहे हैं। इस बीच, जिला महिला एवं बाल कल्याण अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने 17 अगस्त की सुबह पॉक्सो के तहत मामला दर्ज किया और सरकारी अस्पताल में लड़कियों की मेडिकल जांच कराई। कुछ ही देर में आरोपी की गिरफ्तारी कर ली गई। 

महाराष्ट्र का बदलापुर कांड
महाराष्ट्र का बदलापुर कांड - फोटो : PTI
बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प
घटना को लेकर 20 अगस्त को बदलापुर में बंद का आह्वान किया गया और हजारों अभिभावकों, राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्कूल के सामने और बदलापुर रेलवे स्टेशन में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी को फांसी देने की मांग को लेकर पूरे दिन प्रदर्शन किया। स्थिति जब काबू नहीं हुई तो प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई जिसमें दोनों पक्षों से कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और स्थिति संभाली।  

पुलिस मुठभेड़ में मारा गया यौन उत्पीड़न का आरोपी अक्षय शिंदे
पुलिस मुठभेड़ में मारा गया यौन उत्पीड़न का आरोपी अक्षय शिंदे - फोटो : एएनआई
सरकार ने क्या-क्या कार्रवाई की?
घटना सामने आने के बाद 20 अगस्त को राज्य के उप मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने घटना की जांच के लिए एक एसआईटी के गठन का आदेश दिया। इसकी कमान पुलिस महानिरीक्षक स्तर की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आरती सिंह को सौंपी गई। इसी दिन सरकार ने यौन शोषण मामले में एफआईआर दर्ज करने से इनकार करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया। बाद में तीन पुलिस अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया गया। वहीं अगले दिन यानी 21 अगस्त को बदलापुर स्कूल के प्रिंसिपल और दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया।

22 अगस्त को उच्च न्यायालय ने मामले का संज्ञान लिया। इस दौरान अदालत ने सवाल पूछा कि स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसी दिन एसआईटी ने मामले की जांच शुरू की।
और 23 अगस्त को एसआईटी ने अपराध की जानकारी न करने पर स्कूल प्रिंसिपल, सचिव और चेयरमैन के खिलाफ पोक्सो की धाराएं जोड़ीं।

16 सितंबर को एसआईटी ने एक बच्ची की शिकायत के आधार पर मामले में अपना पहला आरोपपत्र दाखिल किया। वहीं दो दिन बाद 19 सितंबर दूसरी लड़की की शिकायत के आधार पर मामले में दूसरा आरोपपत्र दाखिल किया गया। 23 सितंबर को बदलापुर कांड उस वक्त चर्चा में आ गया जब आरोपी अक्षय शिंदे की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। 
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