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बदलापुर मुठभेड़ मामला: पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज न करने पर SIT को हाई कोर्ट की फटकार, कहा- खेदजनक स्थिति

Wed, 30 Apr 2025 05:04 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 30 Apr 2025 05:04 PM IST
सार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बदलाापुर मुठभेड़ मामले में पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज न करने पर एसआईटी को फटकार लगाई और चेतावनी दी कि आदेश न मानने पर अवमानना की कार्यवाही शुरू होगी। सरकार के वकील ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि प्राथमिकी शनिवार तक दर्ज कर ली जाएगी।

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Badlapur accused 'encounter' case: Bombay HC slams SIT for not registering FIR against five cops
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को अपराध शाखा के विशेष जांच दल (एसआईटी) को फटकार लगाते हुए कहा कि उसने बदलाापुर यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी अक्षय शिंदे की कथित मुठभेड़ में हत्या के लिए पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की। कोर्ट ने इसे 'बहुत ही दुखद स्थिति' करार दिया।

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कोर्ट ने कहा कि अगर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती है, तो वह अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर मजबूर होगी। इसके बाद, सरकार के वकील हितेन वेनेगांवकर ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि एसआईटी शनिवार तक प्राथमिकी दर्ज कर लेगी। जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने वेनेगांवकर की आश्वासन को स्वीकार किया। 
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हाईकोर्ट ने अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त लखामी गौतम को सात अप्रैल को आदेश दिया था कि वह शिंदे की मौत की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करें और पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करें। पिछले हफ्ते हाई कोर्ट ने राज्य के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की कड़ी फटकार लगाई थी। सीआईडी ने पहले इस मामले में की जांच की थी। कोर्ट ने मामले में दस्तावेज एसआईटी को न सौंपने को लेकर सीआईडी को फटकार लगाई थी। इसके बाद सीआईडी ने 25 अप्रैल को सभी दस्तावेज एसआईटी को सौंप दिए थे। 

हाई कोर्ट ने बुधवार को जब पूछा कि क्या प्राथमिकी दर्ज की गई है, सरकार के वकील हितेन वेनेगांवकर ने नहीं जवाब दिया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब कोई संज्ञान लेने योग्य अपराध हुआ हो, तो पुलिस को अपनी सोच का इस्तेमाल करके प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए थी। हाईकोर्ट ने सवाल किया, पुलिस पर एक जिम्मेदारी है। सरकारी प्रणाली में जनता का भरोसा न टूटने दें। वहां एक शव है। यह एक अप्राकृतिक मौत है। आपको प्राथमिकी दर्ज करने के लिए और क्या खुलासा चाहिए?


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पीठ ने कहा कि अगर आदेशों का पालन नहीं किया गया तो वह अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर मजबूर होगी। कोर्ट ने कहा, यह कोर्ट के निर्देशों को साफ तौर पर नजरअंदाज करना है। हम संतुष्ट नहीं हैं। यह एक बहुत ही दुखद स्थिति है। अब हमें अवमानना की कार्यवाही करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। 

क्या हुआ था पूरा मामला
अक्षय शिंदे (24 वर्षीय) ठाणे जिले के बदलाापुर स्थित एक स्कूल में दो नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोपी था। 23 सितंबर, 2024 को एक पुलिस वाहन में उसे तलोजा जेल से कल्याण लाया जा रहा था। पुलिस टीम ने दावा किया कि शिंदे ने एक पुलिसकर्मी की बंदूक छीनी और गोली चलाई, जिसके बाद आत्मरक्षा में उसे गोली मारी गई। हालांकि, शिंदे के माता-पिता ने आरोप लगाया कि उसे फर्जी मुठभेड़ में मारा गया और हाई कोर्ट में स्वतंत्र जांच की याचिका दायर की।
 
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