Karnataka: अदालत से श्रीकांत पुजारी को मिली जमानत, बाबरी विध्वंस मामले में किया गया था गिरफ्तार
Karnataka: हुबली की अदालत ने शुक्रवार को हिंदू कार्यकर्ता श्रीकांत पुजारी को जमानत दे दी है। एक दिन पहले उन्हें 1992 के बाबरी विध्वंस के बाद हुए दंगों के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
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हुबली की एक सत्र अदालत ने शुक्रवार को हिंदू कार्यकर्ता श्रीकांत पुजारी को जमानत दे दी है। पुलिस ने दिसंबर 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद हुए दंगों से जुड़े एक मामले में उन्हें पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया था। पुजारी की गिरफ्तारी के बाद राज्य में सियासी तूफान खड़ा हो गया था। भाजपा कार्यकर्ताओं ने जहां उनकी रिहाई को लेकर राज्यभर में प्रदर्शन किया था। वहीं, सत्तारूढ़ कांग्रेस ने इसे कानून-व्यवस्था का हिस्सा बताया था।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत के न्यायाधीश परमेश्वर प्रसन्ना बी ने जमानत देने का आदेश दिया। सरकारी वकील ने गुरुवार को आपत्तियां दर्ज कराई थीं और दावा किया था कि पुजारी कई अन्य मामलों में वांछित है और अदालत की सुनवाई में शामिल होने से बच रहा है।
विपक्षी भाजपा राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े 31 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी और उनकी रिहाई की मांग कर रही थी। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर हिंदुओं के प्रति सख्त होने और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण में लिप्त होने का आरोप लगाया था। वहीं, कांग्रेस ने भाजपा पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पुजारी को एक संदिग्ध बताया था और कहा था कि वह अवैध शराब बिक्री, जुआ और मटका सहित 16 असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों का सामना कर रहा है।
कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर भाजपा ने दी तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने पुजारी की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा था कि यह अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से कुछ दिन पहले 31 साल पुराने मामले को फिर से खोलने के पीछे राज्य सरकार की मंशा को दिखाता है। वहीं, भाजपा नेता डीवी सदानंद गौड़ा ने पूछा था कि मामलों को बंद करना, क्या यह कानूनी सीमाओं के दायरे में था?
भाजपा नेता सीएन अश्वथ नारायण ने कहा था, 'राज्य सरकार भेदभाव नहीं कर सकती और पैसे का दुरुपयोग नहीं कर सकती। सरकार जवाबदेह है। लोग यही मांग कर रहे हैं। तुष्टीकरण की राजनीति या धन का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। जनता केवल वोट बैंक की राजनीति की सराहना नहीं करती है। वे पूरे मामले का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए हम कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के पूरे दृष्टिकोण की निंदा कर रहे हैं। अब उन्हें राष्ट्रवादी होने का एहसास होना चाहिए, सभी वर्गों का सम्मान करना चाहिए, समावेशी होना चाहिए।'
उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने मामले पर क्या कहा था
वहीं, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा था कि उनकी गिरफ्तारी कानून-व्यवस्था की प्रक्रिया का हिस्सा है। राज्य सरकार ने बदले की राजनीति का सहारा नहीं लिया है। शिवकुमार ने कहा था, हम बदले की राजनीति नहीं कर रहे हैं। बल्कि हम कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम कर रहे हैं। हम एक शांतिप्रिय राज्य हैं। यहां असामाजिक गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने भाजपा पर मामले का राजनीतिकरण करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य के गृह मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार केवल लंबित मामलों को निपटाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा था, कानून का उल्लंघन और राज्य का अपमान करने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। भाजपा सात महीने तक विपक्ष के नेता का चुनाव नहीं कर सकी। अब जब आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं, तो वे इन मुद्दों को यह दिखाने के लिए उठा रहे हैं कि वे राजनीतिक रूप से जीवित हैं। लोकतंत्र में लोग जवाब देंगे।
जमानत मिलने के बाद श्रीकांत पुजारी के बेटे मंजूनाथ ने कहा, 'मैं आज बहुत खुश हूं। धन्यवाद।'
#WATCH | Hubballi, Karnataka | After the bail to Shrikanth Pujari, who was arrested for alleged involvement in the riots after the Babri Masjid demolition in 1992, his son Manjunath says, "...I am very happy today...Thank you..." pic.twitter.com/4xKAkcvrCa
— ANI (@ANI) January 5, 2024