आजादी का अमृत महोत्सव: 75 बिंदुओं पर 75 शहरों में आज से कार्यक्रम शुरू, संस्कृति मंत्रालय संग 12 विभाग व मंत्रालय एक मंच पर पर
वैज्ञानिक उपलब्धियों का उत्सव मनाने और भविष्य में विज्ञान व प्रौद्योगिकी की भूमिका तय करने के उद्देश्य से पूरे देश में ‘गौरवशाली सप्ताह’ मनाया जाएगा। यह पहल देश की वैज्ञानिक विरासत और प्रौद्योगिकी कौशल को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है।
विस्तार
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत मंगलवार से 28 फरवरी तक 75 बिंदुओं पर 75 शहरों में कार्यक्रमों का आयोजन होगा। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के साथ 12 विभाग व मंत्रालय एक मंच पर वैज्ञानिक उपलब्धियों का उत्सव मनाएंगे। साथ ही 2047 के स्वर्णिम महोत्सव की रूपरेखा भी तय होगी।
वैज्ञानिक उपलब्धियों का उत्सव मनाने और भविष्य में विज्ञान व प्रौद्योगिकी की भूमिका तय करने के उद्देश्य से पूरे देश में ‘गौरवशाली सप्ताह’ मनाया जाएगा। यह पहल देश की वैज्ञानिक विरासत और प्रौद्योगिकी कौशल को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है। जिससे रक्षा, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, कृषि, खगोल विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में समस्याओं का समाधान खोजने में मदद मिली है।
कार्यक्रम का संस्कृत भावार्थ अपने आप में एक संदेश देता है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी पूरे विश्व में पूजनीय है। देशभर के 75 शहरों में विज्ञान प्रदर्शन, विज्ञान आधारित व्याख्यान, विज्ञान फिल्मों की स्क्रीनिंग, रेडियो वार्ता प्रसारण, विज्ञान पुस्तक मेले, पोस्टर प्रस्तुति और विज्ञान साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन इस महोत्सव का हिस्सा है। हाइब्रिड मोड में आयोजित होने वाले इन आयोजनों में 75 पुरस्कार भी शामिल हैं। इसके लिए 75 स्थानों और संबंधित भागीदार संगठनों की पहचान की गई है, ताकि यह कार्यक्रम स्थानीय भाषाओं (अंग्रेजी और हिंदी के अलावा) में संचालित किए जा सकें।
चार खंड में विभाजित
- पहला खंड विज्ञान व प्रौद्योगिकी इतिहास के 75 केंद्र बिंदु है। जो राष्ट्र निर्माण में आधुनिक विज्ञान के संस्थापकों और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के योगदान को रेखांकित करेगा। इसमें 75 वैज्ञानिकों पर 75 फिल्मों की स्क्रीनिंग और 75 स्थानों पर प्रख्यात वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों के 75 व्याख्यान शामिल होंगे।
- दूसरा खंड आधुनिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी के मील के पत्थर है। इसमें उन प्रमुख खोजों, नवाचारों या आविष्कारों को उजागर किया जाएगा, जिन्होंने वैश्विक विज्ञान या भारत के विकास की कहानी में एक छाप छोड़ी है।
- तीसरा खंड स्वदेशी पारंपरिक आविष्कार और नवाचार है। इसमें ऐसे 75 आविष्कारों या प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसने भारत को पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के भंडार पर आधारित आधुनिक नवाचारों और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद की। जड़ी बूटियों से दवाओं का निर्माण इस कड़ी का एक उदाहरण कहा जा सकता है।
- चौथा खंड ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (बदलता भारत) के अंतर्गत भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अगले 25 वर्षों के लिए आगे की राह पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें भारत और प्रवासी भारतीयों के 75 प्रख्यात वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविद अपनी बात रखेंगे।
जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आज से प्रदर्शनी
जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में मंगलवार से विज्ञान और प्रौद्योगिकी मेगा एक्सपो (प्रदर्शनी), राष्ट्रीय विज्ञान पुस्तक मेला और विज्ञान साहित्य उत्सव शुरू हो रहा है। इसमें विज्ञान लेखकों, संचारकों, कलाकारों, कवियों, नाटककारों, नुक्कड़ नाटक समेत विज्ञान गतिविधियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इन भाषाओं में होगा आयोजन
कार्यक्रम कश्मीरी, डोगरी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, कन्नड़, मलयालम, तमिल, तेलुगु, उड़िया, बंगाली, असमिया, नेपाली, मैथिली, मणिपुरी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं में किया जाएगा। भारतीय भाषाओं को यहां जोड़ने का मकसद आम आदमी को उसी की भाषा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की जानकारी देना है।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विजेताओं का सम्मान
विज्ञान सर्वत्र पूज्यते के तहत mygov.in के माध्यम से निबंध, नारा, कविता लेखन, पोस्टर, लघु फिल्म, ऑनलाइन विज्ञान प्रौद्योगिकी प्रश्नोत्तरी आदि प्रतियोगिताएं आयोजित हुई थीं। इन प्रतियोगिताओं के 75 विजेताओं को 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के मौके पर पुरस्कार दिया जाएगा। यह कार्यक्रम दिल्ली के विज्ञान भवन में होर्गा।