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मोदीकेयर को लग सकता है झटका, निजी अस्पतालों ने कहा- इतनी कम कीमत में अच्छा इलाज संभव नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 02 Jun 2018 10:20 AM IST
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फोर्टिस, अपोलो, मेदांता और नारायणा हेल्थ जैसे कुछ प्रमुख निजी अस्पतालों ने सरकार के महत्वाकांक्षी 'आयुषमान भारत' पर चिंता जताया है। उनका कहना है कि इसके तहत कुछ क्रिटिकल उपचारों के लिए तय की गई दरें व्यवहारिक नहीं हैं।
सूत्रों ने बताया कि कुछ निजी अस्पतालों के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न उद्योग मंचों के प्रतिनिधित्व के बाद शुक्रवार को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए नीति आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की।
एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) की आयुषमान भारत के सीईओ इंदु भूषण को लिखी चिट्ठी में कहा है, "कुल मिलाकर ऐसा प्रतीत होता है कि दरों को तय करने में कोई वैज्ञानिक आधार नहीं अपनाया गया है। इन परिस्थितियों में, आप कृपया कर इस बात की सराहना कर सकते हैं कि, जब तक कि दरें उचित और वैज्ञानिक रूप से तय नहीं हो जाती तब तक निजी अस्पतालों के लिए गुणवत्ता भरी स्वास्थ्य सेवाएं देना संभव नहीं है।"
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सूत्रों ने बताया कि कुछ निजी अस्पतालों के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न उद्योग मंचों के प्रतिनिधित्व के बाद शुक्रवार को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए नीति आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की।
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एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) की आयुषमान भारत के सीईओ इंदु भूषण को लिखी चिट्ठी में कहा है, "कुल मिलाकर ऐसा प्रतीत होता है कि दरों को तय करने में कोई वैज्ञानिक आधार नहीं अपनाया गया है। इन परिस्थितियों में, आप कृपया कर इस बात की सराहना कर सकते हैं कि, जब तक कि दरें उचित और वैज्ञानिक रूप से तय नहीं हो जाती तब तक निजी अस्पतालों के लिए गुणवत्ता भरी स्वास्थ्य सेवाएं देना संभव नहीं है।"
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"गुणवत्ता वाली इलाज के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं"
सरकार का कहना है कि दरों को बहुत सावधानीपूर्वक तय किया गया है। भूषण ने कहा, "दरें राष्ट्रीय स्तर पर तय की जाती हैं। हमने राज्यों को दरों में 10 फीसदी तक बदलाव की छूट भी दी है। इसके अलावा निजी अस्पतालों के लिए 30 फीसदी तक प्रोत्साहन दिया गया है।
नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य श्रेणी-2 और श्रेणी-3 के शहरों में गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों को मरीजों की ज्यादा संख्या से फायदा होगा, लेकिन वे साथ में दी जाने वाली गैरजरूरी सेवाओं को हटाकर लागत में कटौती कर सकते हैं।
हालांकि निजी अस्पताल इससे सहमत नहीं हैं। नारायणा हेल्थ के अध्यक्ष डॉ. देवी शेट्टी ने कहा, "गुणवत्ता वाली इलाज के लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते है। तय की गई कुछ कीमतें बेहद कम हैं और हमने इस बारे में सरकार को बताया है। मुझे उम्मीद है कि उन कीमतों में बदलाव किया जाएगा।"
मेदांता के डॉ, नरेश त्रेहन ने कहा कि कीमतों को तय करने के लिए सरकार को एक स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त करनी चाहिए।
नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य श्रेणी-2 और श्रेणी-3 के शहरों में गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों को मरीजों की ज्यादा संख्या से फायदा होगा, लेकिन वे साथ में दी जाने वाली गैरजरूरी सेवाओं को हटाकर लागत में कटौती कर सकते हैं।
हालांकि निजी अस्पताल इससे सहमत नहीं हैं। नारायणा हेल्थ के अध्यक्ष डॉ. देवी शेट्टी ने कहा, "गुणवत्ता वाली इलाज के लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते है। तय की गई कुछ कीमतें बेहद कम हैं और हमने इस बारे में सरकार को बताया है। मुझे उम्मीद है कि उन कीमतों में बदलाव किया जाएगा।"
मेदांता के डॉ, नरेश त्रेहन ने कहा कि कीमतों को तय करने के लिए सरकार को एक स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त करनी चाहिए।
ये हैं सीजीएचएस और आयुष्मान भारत की दरों में अंतर
हालांकि स्वास्थ्य उद्योग के कुछ शीर्ष अधिकारियों ने बताया है कि सरकार ने इस बात के संकेत दिए हैं कि जहां कीमतें बहुत कम हैं वहां कुछ दरों में संशोधन की गुंजाइश है । एक अधिकारी ने कहा कि स्टेंट और उसे लगाने की कीमतों पर पुनर्विचार किया जा रहा है। हालांकि भूषण ने कहा कि किसी भी संशोधन के लिए कंपनियां का अभी तक कोई मजबूत पक्ष नहीं है।
स्वास्थ्य आयोग के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के अंतर्गत इलाज के लिए 1,354 पैकेजों की दरों को तय कर दिया है। मोदी केयर के नाम से लोकप्रिय की इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ 'वंचित' परिवारों के 50 करोड़ लोगों को सालाना पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा देने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वास्थ्य आयोग के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के अंतर्गत इलाज के लिए 1,354 पैकेजों की दरों को तय कर दिया है। मोदी केयर के नाम से लोकप्रिय की इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ 'वंचित' परिवारों के 50 करोड़ लोगों को सालाना पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा देने का लक्ष्य रखा गया है।
| पैकेज | सामान्य रेट (रुपये) | सीजीएचएस | आयुष्मान भारत (पहले) | आयुष्मान भारत (अब) |
| एंजियोप्लास्टि | 90 हजार | 90 हजार | 40 हजार | 65 हजार |
| सीएबीजी | 2 लाख | 1.10 लाख | 1.10 लाख | 1.10 लाख |
| नी रिप्लेसमेंट | 2 लाख | 1.50 लाख | 90 हजार | 80 हजार |
| स्पाइन सर्जरी | 1 लाख | 24 हजार | 20 हजार | 40 हजार |
| सर्वाइकल सर्जरी | 1.25 लाख | 25 हजार | 20 हजार | 40 हजार |
| न्यूरो सर्जरी | 1.10 लाख | 23 हजार | 20 हजार | 30 हजार |
| ट्यूमर सर्जरी | 2.50 लाख | 35 हजार | 35 हजार | 50 हजार |
| आर्टरी सर्जरी | 3.50 लाख | 59 हजार | 42 हजार | 65 हजार |