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अयोध्या पर 'सुप्रीम' फैसला, दशकों बाद मिले इन सवालों के जवाब
Sat, 09 Nov 2019 10:08 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sat, 09 Nov 2019 10:08 PM IST
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राम मंदिर
- फोटो : self
अयोध्या भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कई ऐसे सवालों के जवाब भी मिल गए हैं जिसका इंतजार दशकों के था। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन का मालिकाना हक रामलला विराजमान को सौंप दिया है। साथ ही सरकार को आदेश दिया है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में कहीं दूसरी जगह पांच एकड़ की जमीन दी जाए।
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भगवान राम का जन्मस्थान कहां है?
कोर्ट ने कहा कि भगवान राम का जन्म विवादित जमीन पर हुआ इसकी पुष्टि पुरातत्व विभाग के उत्खनन वाली रिपोर्ट में भी नहीं हुई। जिस जगह बाबरी मस्जिद बनी हुई थी उसके नीचे मंदिरनुमा कोई निर्माण था। इसलिए आस्था को झुठलाया नहीं जा सकता।
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विवादित जमीन पर मालिकाना हक किसका?
कोर्ट ने फैसले में कहा कि विवादित जमीन पर मस्जिद का दावा मुस्लिम पक्ष साबित नहीं कर पाया। इस जमीन को रामलला विराजमान को सौंपा जाए। मुस्लिमों को मंदिर बनाने के लिए पांच एकड़ भूमि दी जाएगी।
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अभी जमीन पर काबिज कौन?
जमीन अभी विवादित थी और इसपर भगवान की मूर्तियां 22-23 दिसंबर 1949 में रखी गईं थी। अब इस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार तीन महीनों में ट्रस्ट का गठन करे। मूर्तियों की पूजा गोपाल विशारद करते रहेंगे।
किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया। जिसमें उसने विवादित ढांचे के नीचे मंदिरनुमा निर्माण होने की बात कही थी।
कौन हैं रामलला विराजमान
रामलला विराजमान स्वंय भगवान राम हैं। सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान को न्यायिक व्यक्ति माना है। उन्हीं की याचिका पर मालिकाना हक का फैसला सुनाया है।