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अयोध्या: सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में स्कंद पुराण, रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण का किया उल्लेख
Sat, 09 Nov 2019 07:42 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sat, 09 Nov 2019 07:42 PM IST
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अयोध्या मामला
- फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नौ नवंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में रामलला विराजमान को विवादित भूमि सौंपी और इसी के साथ अयोध्या में ही मस्जिद बनाने का इंतजाम भी कर दिया।
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रामलला विराजमान को विवादित भूमि सौंपने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा भी खारिज कर दिया। साथ ही सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को किसी दूसरे जगह पांच एकड़ भूमि देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्कंद पुराण, वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस की चौपाइयों का उल्लेख भी किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में वाल्मीकि रामायण को भगवान राम के जीवन का सबसे मुख्य और प्राचीन ग्रंथ बताया गया है।
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फैसले की कॉपी में लिखा गया है कि वाल्मीकि रामायण भगवान राम के जीवन और उनकी लीलाओं पर सबसे पुराना ग्रंथ है, जिसका रचना का काल ईसा से 300 से 200 साल पहले का है। इसे महाभारत और श्रीमद्भागवत के भी पहले का माना जाता है। वाल्मीकि रामायण के बालकांड के 18वें अध्याय के एक श्लोक का उल्लेख किया है।
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प्रोद्यमाने जगन्नाथम् सर्वलोकनमस्कृतम्।
कोसल्याजनयद रामं दिव्यलक्षणंसंयुतम्।।
अर्थात- जिन परमेश्वर, जगत के स्वामी, जिन्हें सभी पूजते हैं, नमस्कार करते हैं, उन परमात्मा विष्णु को कौसल्या ने राम के रुप में जन्म दिया, जो सभी दिव्य लक्षणों से युक्त थे।
स्कंद पुराण के इस श्लोक का किया उल्लेख
स्कंद पुराण के अयोध्या महात्म्य के वैष्णवकांड में रामजन्म भूमि का उल्लेख किया गया है। इसके 18वें और 19वें श्लोक में उन स्थानों का जिक्र है, जिनके आसपास जन्मभूमि है। कोर्ट के फैसले में भी उन श्लोकों का जिक्र है जिसमें जन्मभूमि के बारे में बताया गया है।
तस्मात स्थानवं एशाने रामजन्म प्रवतर्ते, जन्मस्थानमिदं प्रोक्तं मोक्षादिफलसाधनं।
विघ्नेश्वरात्पूर्वभागे वसिष्ठात उत्तरेतथा लौमशात पश्चिमे भागे जन्मस्थानं तत: स्मृतम।।
अर्थात- उस स्थान के ईशान (उत्तर-पूर्व कोण) में राम का जन्म हुआ। इसे ही रामजन्म स्थान कहा गया है, जिस का दर्शन मोक्षादि पाने का साधन है। विघ्नेश्वर से पूर्व, वासिष्ठ से उत्तर में और लोमशात के पश्चिम भाग में मौजूद इस स्थान को राम की जन्म भूमि कहा गया है।
जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा॥
अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा॥
कस्यप अदिति महातप कीन्हा। तिन्ह कहुँ मैं पूरब बर दीन्हा॥
ते दसरथ कौसल्या रूपा। कोसलपुरीं प्रगट नर भूपा॥
तिन्ह कें गृह अवतरिहउँ जाई। रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई॥
नारद बचन सत्य सब करिहउँ। परम सक्ति समेत अवतरिहउँ॥
अर्थात- हे मुनि, सिद्ध और देवताओं के स्वामियों, डरो मत। तुम्हारे लिए मैं मनुष्य का रूप धारण करूंगा और उदार (पवित्र) सूर्यवंश में अंशों सहित मनुष्य का अवतार लूंगा। कश्यप और अदिति ने भारी तप किया था। मैं पहले ही उनको वर दे चुका हूं। वे ही दशरथ और कौसल्या के रूप में मनुष्यों के राजा होकर श्रीअयोध्यापुरी में प्रकट हुए हैं। उन्हीं के घर जाकर मैं रघुकुल के चार श्रेष्ठ भाइयों के रूप में अतार लूंगा। नारद के सब वचन मैं सत्य करूंगा और अपनी पराशक्ति के सहित अवतार लूंगा।
तस्मात स्थानवं एशाने रामजन्म प्रवतर्ते, जन्मस्थानमिदं प्रोक्तं मोक्षादिफलसाधनं।
विघ्नेश्वरात्पूर्वभागे वसिष्ठात उत्तरेतथा लौमशात पश्चिमे भागे जन्मस्थानं तत: स्मृतम।।
अर्थात- उस स्थान के ईशान (उत्तर-पूर्व कोण) में राम का जन्म हुआ। इसे ही रामजन्म स्थान कहा गया है, जिस का दर्शन मोक्षादि पाने का साधन है। विघ्नेश्वर से पूर्व, वासिष्ठ से उत्तर में और लोमशात के पश्चिम भाग में मौजूद इस स्थान को राम की जन्म भूमि कहा गया है।
रामचरित मानस के बालकांड के चौपाइयों का भी दिया हवाला
फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने रामचरित मानस के बालकांड के उस भाग का उल्लेख किया गया है जिसमें ये चौपाइयां लिखी गई हैं।जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा॥
अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा॥
कस्यप अदिति महातप कीन्हा। तिन्ह कहुँ मैं पूरब बर दीन्हा॥
ते दसरथ कौसल्या रूपा। कोसलपुरीं प्रगट नर भूपा॥
तिन्ह कें गृह अवतरिहउँ जाई। रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई॥
नारद बचन सत्य सब करिहउँ। परम सक्ति समेत अवतरिहउँ॥
अर्थात- हे मुनि, सिद्ध और देवताओं के स्वामियों, डरो मत। तुम्हारे लिए मैं मनुष्य का रूप धारण करूंगा और उदार (पवित्र) सूर्यवंश में अंशों सहित मनुष्य का अवतार लूंगा। कश्यप और अदिति ने भारी तप किया था। मैं पहले ही उनको वर दे चुका हूं। वे ही दशरथ और कौसल्या के रूप में मनुष्यों के राजा होकर श्रीअयोध्यापुरी में प्रकट हुए हैं। उन्हीं के घर जाकर मैं रघुकुल के चार श्रेष्ठ भाइयों के रूप में अतार लूंगा। नारद के सब वचन मैं सत्य करूंगा और अपनी पराशक्ति के सहित अवतार लूंगा।