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अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने दीं दलीलें...वकील को धमकाने पर नोटिस

Tue, 03 Sep 2019 08:41 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 03 Sep 2019 08:41 PM IST
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Ayodhya Case: Supreme Court five-judge Constitution bench started hearing muslim party is arguing
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

उच्चतम न्यायालय में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की लगातार 18वें दिन सुनवाई हुई। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व में मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील को धमकी देने का मामला भी उठा। मुस्लिम पक्ष की तरफ से पेश हुए वकील राजीव धवन ने अदालत से अपनी दलीलें देने के लिए 20 दिन का समय मांगा।

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इस दौरान राजीव धवन ने कहा कि तमिलनाडु और राजस्थान के दो लोगों की ओर से उन्हें धमकियां मिल रही हैं। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने आरोपियों के खिलाफ नोटिस जारी किया। धवन ने कहा कि आरोपियों ने उनके साथ घर और कोर्ट परिसर में रोक-टोक करने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील के साथ इस तरह का बर्ताव कोर्ट की अवमानना और आपराधिक मामला है। 

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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस भूमि विवाद पर 18वें दिन सुनवाई शुरू होते ही राजीव धवन की अवमानना याचिका पर ये नोटिस जारी किए। पीठ अवमानना के इस मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद करेगी।

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। प्रमुख याचिकाकर्ता एम सिद्दीक और ऑल इंडिया सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने पूर्व सरकारी अधिकारी एन षणमुगम और राजस्थान के निवासी संजय कलाल बजरंगी के खिलाफ शुक्रवार को शीर्ष अदालत में अवमानना याचिका दायर की थी। उनका आरोप है कि मुस्लिम पक्षकारों की ओर पैरवी करने की वजह से उन्हें धमकी दी जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी एन. षणमुगम से 14 अगस्त, 2019 को उन्हें एक पत्र मिला, जिसमें उन्हें मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश होने की वजह से धमकी दी गई थी। धवन ने यह भी कहा है कि उन्हें राजस्थान के निवासी संजय कलाल बजरंगी से व्हाट्सऐप संदेश मिला है और वह भी न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप करने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक व्यक्ति धमकी भरे व्यवहार के साथ उन पर न्यायालय परिसर और घर तक टिप्पणी करते रहते हैं। 

उन्होंने याचिका में कहा कि इस तरह से पत्र भेजकर कथित अवमाननाकर्ता ने आपराधिक अवमानना की है क्योंकि वह शीर्ष अदालत में एक पक्षकार की ओर से पेश होकर अपने दायित्व का निर्वहन करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता को धमकी दे रहा है और उसे इस तरह का पत्र नहीं लिखना चाहिए था।


तथ्यों के आधार पर हो फैसला 

अयोध्या मामले पर धवन ने कहा कि आजादी और संविधान की स्थापना के बाद किसी भी धार्मिक स्थान का परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। इस मामले में तथ्यों के आधार पर फैसला दिया जाना चाहिए। 1934 में निर्मोही अखाड़ा ने गलत तरीके से इस जमीन पर कब्जा किया था। उस वक्त वक्फ निरीक्षक की ओर से इस पर रिपोर्ट भी दी गई थी। 
 

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