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Aviation: अब नहीं चलेगी एयरलाइंस की 'डार्क पैटर्न' ट्रिक, जानिए नए नियमों से कंपनियों का कितना बिगड़ेगा गणित
Thu, 19 Mar 2026 03:42 PM IST
Rahul Kumar
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Thu, 19 Mar 2026 03:42 PM IST
सार
एयरलाइंस कंपनियां अक्सर टिकट का किराया कम रखती हैं, ताकि ज्यादा यात्री मिलें। लेकिन सीट चुनने जैसी सुविधाओं के लिए अलग से शुल्क लेती हैं। इससे उन्हें अपनी कमाई और मुनाफा बनाए रखने में मदद मिलती है।
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बोइंग एयरलाइन
- फोटो : Freepik
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विस्तार
निजी एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी पर सरकार ने ब्रेक लगा दिया है। डीजीसीए के नए फैसलों से कंपनियों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अब उन्हें हर उड़ान में 60 फीसदी सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के देनी होंगी और एक ही पीएनआर वाले यात्रियों को साथ बैठाना भी जरूरी होगा। इस कदम से यात्रियों को बड़ी राहत जरूर मिलेगी। जबकि सीट चयन जैसी सेवाओं से होने वाली एयरलाइंस की कमाई पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
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मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है, विमानन कंपनियां और ट्रैवल एजेंट अपनी वेबसाइट पर डार्क पैटर्न वाली तरकीबें अपना रही थी। वे यात्रियों को टिकट बुक करते समय या वेब चेक इन के दौरान मनमाफिक सीट चुनने के लिए अतिरिक्त शुल्क देने के लिए उकसाते हैं। मगर वास्तव में अतिरिक्त शुल्क से मुक्त सीटों की संख्या काफी कम होती है। कई मामलों में तो अतिरिक्त शुल्क न देने पर एक ही पीएनआर वाले यात्रियों को अलग-अलग सीटों पर बिठाया जाता है जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है।
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सरकार ने अब हर उड़ान में 60 फीसदी सीटों को अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखने का नियम लागू किया है। ऐसे में माना जा रहा है इससे एयरलाइंस की अतिरिक्त कमाई, खासकर पसंदीदा सीट चुनने से होने वाली आय पर असर पड़ सकता है। दरअसल, सीट चयन शुल्क एयरलाइंस की कमाई का बड़ा हिस्सा होता है। मुनाफा बढ़ाने के लिए एयरलाइंस ऐसी सेवाओं पर तेजी से निर्भर हो रही हैं। इसका असर इंडिगो के वित्तीय नतीजों में भी दिखता है। वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही में कंपनी की अन्य स्रोतों से आय 13.6 प्रतिशत बढ़कर 2,446.2 करोड़ रुपये हो गई, जबकि टिकट से होने वाली आय में 6.2 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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सूत्रों का कहना है,एयरलाइंस कंपनियां अक्सर टिकट का किराया कम रखती हैं, ताकि ज्यादा यात्री मिलें। लेकिन सीट चुनने जैसी सुविधाओं के लिए अलग से शुल्क लेती हैं। इससे उन्हें अपनी कमाई और मुनाफा बनाए रखने में मदद मिलती है। मंत्रालय का कहना है कि इन कदमों से यात्रियों को राहत मिलेगी, उनकी शिकायतें कम होंगी और विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी। यह फैसले ऐसे समय में लिए गए हैं, जब उड़ान जैसी योजनाओं से हवाई यात्रा तेजी से बढ़ रही है।