AUF-UNICEF Workshop: अमर उजाला फाउंडेशन और यूनिसेफ की कार्यशाला में छात्र-छात्राओं ने सीखे डिजिटल पत्रकारिता के गुर
इस कार्यशाला में पत्रकारिता के छात्र-छात्राओं ने यह जाना कि जलवायु परिवर्तन का समुदायों और खासकर महिलाओं-बच्चों पर किस तरह असर पड़ता है।
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अमर उजाला फाउंडेशन और यूनिसेफ की तरफ से गुरुवार को नोएडा में जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और कोविड-19 टीकाकरण जैसे मुद्दों पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें अलग-अलग विश्वविद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं ने डिजिटल-मोबाइल पत्रकारिता के गुर सीखे।
जलवायु परिवर्तन का महिलाओं-बच्चों पर असर: जाफरीन चौधरी
इस कार्यशाला की शुरुआत यूनिसेफ इंडिया की कम्युनिकेशन, एडवोकेसी और भागीदारी प्रमुख जाफरीन चौधरी के भाषण से हुई। उन्होंने बताया कि अमर उजाला फाउंडेशन और यूनिसेफ की लंबे समय से भागीदारी है। अमर उजाला फाउंडेशन कोविड-19, टीकाकरण, पैरेंटिंग और एनीमिया के क्षेत्र में जागरुकता से जुड़े कार्यक्रमों में यूनिसेफ की कोशिशों का समर्थन करता है। उन्होंने मोबाइल की ताकत पर बात करते हुए कहा कि इसके जरिए बच्चों से जुड़े विषय और पर्यावरण व कोरोना टीकाकरण जैसे मुद्दों पर जागरुकता संदेश फैलाने की असीम संभावनाएं हैं।
नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप के डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि जीका वायरस को लेकर ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि देश के वैज्ञानिक इससे बचाव के लिए भी टीका बनाने की तैयारी में जुट गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अगर आपने कोरोना का टीका लगवाया है तो रक्तदान कर सकते हैं। टीकाकरण के बाद किसी तरह का कोई संक्रमण नहीं होता है, न ही रक्तदान करने वाले को और न ही रक्त लेने वाले को। अगर कोरोना संक्रमित हो गए हैं तो तीन सप्ताह यानी 21 दिन के बाद रक्तदान कर सकते हैं।
उत्तरी-दक्षिणी ध्रुवों पर तापमान बढ़ने का खतरा: सरबजीत सिंह
जलवायु परिवर्तन से जुड़े सत्र में यूनिसेफ के इमरजेंसी विशेषज्ञ सरबजीत सिंह सहोटा ने बताया कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर सजग होने की जरूरत है। जब हम यह ग्लोबल वॉर्मिंग की बात करते हैं तो दुनियाभर में औसत तापमान तो एक-दो डिग्री बढ़ने का खतरा है, लेकिन उत्तरी-दक्षिणी ध्रुवों पर तापमान पांच डिग्री तक बढ़ सकता है।
पानी को लेकर हमने एक गलती कर दी: विमलेंदु झा
पर्यावरण विशेषज्ञ विमलेंदु झा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का किसानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। किसानों को पलायन तक करना पड़ जाता है। नदियों की स्थिति भी ठीक नहीं है। हमने पीने के पानी के मामले में बीस साल पहले एक गलती कर दी। हम वाटर प्यूरिफायर लेकर आए, लेकिन हमने पानी को उसके मूल स्रोत पर ही ठीक करने पर ध्यान नहीं दिया।
किसानों के साथ-साथ महिलाओं-बच्चों पर भी जलवायु परिवर्तन का असर: आदित्य पटेल
डीआरडीओ में सहायक निदेशक आदित्य पटेल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जब बाढ़ आती है या सूखा पड़ता है तो छोटे किसान सबसे ज्यादा चपेट में आते हैं। नुकसान सिर्फ किसानों को ही नहीं होता, बल्कि उनके परिवार की महिलाओं और बच्चों पर भी पड़ता है।
कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को मोबाइल जर्नलिज्म, गैजेट्स और पॉडकास्ट की बारीकियां भी बताई गईं। अमर उजाला के पत्रकारों-संवाददाताओं ने छात्र-छात्राओं का इन विषयों पर मार्गदर्शन किया। इस कार्यशाला में शारदा यूनिवर्सिटी, एमिटी यूनिवर्सिटी, गलगोटिया यूनवर्सिटी और नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।