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विपक्ष का हल्लाबोल: 'आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास'; यूजीसी नियमों के मसौदे के विरोध में उतरे राहुल

Thu, 06 Feb 2025 01:48 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Thu, 06 Feb 2025 01:48 PM IST
सार

दिल्ली के जंतर-मंतर द्रमुक द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नियमों के मसौदे के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति पर यूजीसी के मसौदा नियम आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश है। इसका उद्देश्य देश पर 'एक इतिहास, एक परंपरा, एक भाषा' थोपने का अपना एजेंडा है। 

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Attempt to push RSS agenda, Rahul slams govt at protest against draft UGC regulations
राहुल गांधी ने केंद्र पर कसा तंज। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ड्राफ्ट नियमों को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने इसे लेकर केंद्र पह हमला बोलते हुए कहा कि वे राज्य सरकारों की सारी शक्ति अपने हाथ में लेना चाहते हैं। 

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'इतिहास-संस्कृतियों और परंपराओं का उन्मूलन करना संघ का उद्देश्य'
दिल्ली के जंतर-मंतर द्रमुक द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नियमों के मसौदे के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति पर यूजीसी के मसौदा नियम आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश है। इसका उद्देश्य देश पर 'एक इतिहास, एक परंपरा, एक भाषा' थोपने का अपना एजेंडा है। राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का उद्देश्य देश के अन्य सभी इतिहास, संस्कृतियों और परंपराओं का उन्मूलन करना है। यूजीसी के मसौदा नियम इसका शुरुआती बिंदु हैं। वे यही हासिल करना चाहते हैं। यह एक तरह से संविधान पर खुले हमले की तरह है। अलग-अलग राज्यों की शिक्षा प्रणाली के साथ छेड़-छाड़ की जो कोशिश की जा रही है।

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उन्होंने कहा कि हर राज्य की अपनी परंपराएं अपना इतिहास और भाषा होती है। मैं हमेशा कहता हूं कि संविधान में, भारत को 'राज्यों का संघ' कहा जाता है, इसका मतलब है कि ये सभी इतिहास, परंपराएं, भाषाएं एक साथ मिलकर भारत को राज्यों का संघ बनाती हैं और इसलिए हमें इसके बारे में इसी तरह सोचना होगा। हमें सभी भाषाओं, सभी संस्कृतियों, सभी परंपराओं, सभी इतिहासों का सम्मान करना होगा और हमें समझना होगा कि वे कहां से आ रहे हैं।

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अखिलेश यादव ने भी कसा तंज
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वे राज्य सरकारों की सारी शक्ति अपने हाथ में लेना चाहते हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि वे राजनेताओं को उद्योगपतियों का नौकर बनाना चाहते हैं। हम कभी भी नई शिक्षा नीति का समर्थन नहीं कर सकते।  
 

बेंगलुरू में छह राज्यों के उच्च शिक्षा मंत्रियों का हुआ था सम्मेलन 
बता दें कि कांग्रेस ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति पर यूजीसी नियमों के मसौदे को संविधान विरोधी करार दिया है। साथ ही पार्टी ने मांग की है कि इन्हें तुरंत वापस लिया जाए। कांग्रेस महासचिव संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा था कि कर्नाटक के बेंगलुरू में छह राज्यों के उच्च शिक्षा मंत्रियों का सम्मेलन हुआ था। इसमें कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और झारखंड (सभी विपक्ष शासित राज्यों) के छह मंत्रियों या उनके प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इन नेताओं ने यूजीसी के मसौदा नियमों पर 15 सूत्री प्रस्ताव अपनाया था।

उन्होंने कहा था कि संघवाद का संवैधानिक सिद्धांत पवित्र है और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतिम प्रयासों में से एक होनी चाहिए। रमेश ने जोर देकर कहा था कि इन मसौदा नियमों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

दक्षिण के कुछ राज्य इसके विरोध में क्यों? 
दक्षिण के गैर भाजपाई राज्यों खास तौर पर तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक यूजीसी के मसौदा नियमों के खिलाफ हैं। उनता तर्क है कि ये नियम राज्य की स्वायत्तता को कम करते हैं। उनका दावा है कि नियम विश्वविद्यालय प्रशासन पर राज्य सरकार के प्रभाव को कम करते हैं, खास तौर पर कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर उनका विरोध है। बता दें कि इस समय कुलपति की नियुक्ति में राज्य सरकारों की भी अहम भूमिका होती है, लेकिन नए नियमों में यह शक्ति केंद्रीय प्राधिकरण को दी गई है। 

इसके अलावा विरोधी राज्यों की एक और चिंता यह है कि नए नियम संघवाद के मूल ढांचे के खिलाफ हैं। यूजीजी मसौदा नियमों के विरोध में उतरे राज्यों का तर्क है कि मसौदा नियम सहकारी संघवाद की भावना का उल्लंघन करते हैं , क्योंकि वे निर्णय लेने को केंद्रीकृत करते हैं। वहीं, कर्नाटक का डर है कि नये नियमों के जरिये क्षेत्रीय शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने वाली राज्य-विशिष्ट नीतियों को कमजोर किया जा रहा है ।

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