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ईडी: 3 साल में पीएमएलए के तहत 33 हजार करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच, फेमा के 8452 मामलों की जांच
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Updated Sat, 27 Oct 2018 03:56 PM IST
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ईडी
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प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले तीन साल में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 536 केसों में 33563 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच की है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के भी 8452 मामलों की जांच चल रही है। अब बात करते हैं कि साल 2005 से लेकर 2015 तक की।
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इस अवधि में पीएमएलए के अंतर्गत मात्र 9003 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच की गई थी, जबकि फेमा के तहत दर्ज मामलों की जांच देखें तो वह आंकडा 9501 है। ईडी के निदेशक करनैल सिंह का शुक्रवार को अंतिम कार्यदिवस था। वे दो दिन बाद रिटायर हो रहे हैं। चर्चा है कि भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) उत्तरप्रदेश के अधिकारी संजय मिश्रा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कमान संभाल सकते हैं।
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खास बात यह है कि ईडी ने एक अक्तूबर 2005 से लेकर 31 मार्च 2015 तक फेमा के 4725 मामलों की जांच पूरी की थी, जबकि पिछले तीन साल में 5495 केसों की जांच पूरी हो चुकी है। इन्हीं मामलों में कारण बताओ नोटिस की बात करें तो दस साल में ऐसे 2130 नोटिस जारी हुए थे। दूसरी ओर गत तीन वर्ष में 2621 केसों में यह नोटिस जारी किया गया है। पीएमएलए के अंतर्गत 2005-2015 के बीच 2045 केस दर्ज किए गए, जबकि 2015-2018 की अवधि में दर्ज मामलों की संख्या 536 रही है। इन्हीं मामलों में 2015 से लेकर अब तक 565 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी किए गए हैं। दस साल में ऐसे 492 ऑर्डर निकाले गए थे।
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बता दें कि ईडी द्वारा 2005-2015 के दौरान दर्ज किए गए मामलों में पुष्टि हुए केसों की संख्या 355 थी तो दूसरी तरफ गत तीन वर्ष में पुष्टि हुए मामलों की संख्या 528 रही है। प्राधिकरण निर्णय के तहत पीएमएलए के जिन मामलों की पुष्टि हुई थी, उनमें पीएओ के अंतर्गत अटैच प्रॉपर्टी की कीमत 21319 करोड़ रुपये थी। यह पिछले तीन साल का डॉटा है।
यदि इससे पहले के दस साल की बात करें तो वह संख्या 4832 करोड़ रुपये रही है। 2005 से 2015 तक अभियोजन पक्ष की तरफ से 173 शिकायत दर्ज हुई थी, लेकिन पिछले तीन वर्ष में ऐसी 391 शिकायत दर्ज की गई हैं। ईडी ने बैंक फ्रॉड के स्टर्लिंग बायोटेक मामले में 4701 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच की है। पीएनबी घोटाले के आरोपी नीरव मोदी की विदेशों में स्थित 40 बिलियन मूल्य की संपत्ति अटैच की गई है।
आईआरएस अधिकारी के हाथ में जाएगी ईडी की कमान
अभी तक माना जा रहा था कि ईडी निदेशक करनैल सिंह को अप्रैल 2019 तक एक और सेवा विस्तार मिल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। करनैल सिंह आईपीएस अधिकारी हैं, जबकि उनसे पहले निदेशक पद पर काम कर चुके राजीव कटोच आईएएस रहे हैं। इस बार ईडी निदेशक का पद आईआरएस के पाले में जाने की प्रबल संभावना बन गई है। आईआरएस के 1984 बैच के अधिकारी संजय मिश्रा ने अभी तक कई बड़े केसों की जांच की है। इनमें नेशनल हेराल्ड का केस भी शामिल है।
इस केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर आपराधिक हेराफेरी का मामला बना था। इसके अलावा उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपति होने के मामले की जांच की थी। अभी वे एक बड़े मीडिया हाउस द्वारा टैक्स चोरी करने के मामले की भी जांच कर रहे हैं। संजय मिश्रा को प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव नृपेन्दर मिश्रा का करीबी माना जाता है। इस साल जनवरी में उन्हें आयकर विभाग के जोन-4 में आयुक्त पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके नियुक्ति आदेशों पर वित्त मंत्री अरुण जेटली के साइन थे।
इस केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर आपराधिक हेराफेरी का मामला बना था। इसके अलावा उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपति होने के मामले की जांच की थी। अभी वे एक बड़े मीडिया हाउस द्वारा टैक्स चोरी करने के मामले की भी जांच कर रहे हैं। संजय मिश्रा को प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव नृपेन्दर मिश्रा का करीबी माना जाता है। इस साल जनवरी में उन्हें आयकर विभाग के जोन-4 में आयुक्त पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके नियुक्ति आदेशों पर वित्त मंत्री अरुण जेटली के साइन थे।
मिश्रा को पहले कार्यकारी निदेशक बनाया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार निवर्तमान डायरेक्टर करनैल सिंह को छह माह का सेवा विस्तार देना चाहती थी, लेकिन पूर्व आईआरएस अफसर उदय बाबू खलवाडेकर द्वारा उनके सेवा विस्तार काल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। चूंकि वे पहले से ही सेवा विस्तार पर चल रहे थे, इसलिए अब सरकार ने उनके मामले में कदम आगे बढ़ाना उचित नहीं समझा। करनैल सिंह अगस्त 2017 में रिटायर हुए थे, लेकिन उन्हें दो साल का सेवा विस्तार मिल गया।
हालांकि उनका यह सेवा विस्तार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अक्तूबर 2016 से प्रभावी माना गया था। संजय मिश्रा, भाजपा और आरएसएस दोनों की पसंद बताए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, संजय मिश्रा को पहले ईडी का कार्यकारी निदेशक बनाया जा सकता है और कुछ माह बाद उन्हें स्थायी तौर से निदेशक पद पर नियुक्त किया जा सकता है।
हालांकि उनका यह सेवा विस्तार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अक्तूबर 2016 से प्रभावी माना गया था। संजय मिश्रा, भाजपा और आरएसएस दोनों की पसंद बताए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, संजय मिश्रा को पहले ईडी का कार्यकारी निदेशक बनाया जा सकता है और कुछ माह बाद उन्हें स्थायी तौर से निदेशक पद पर नियुक्त किया जा सकता है।