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भारी विरोध के बाद वृंदावन में नास्तिक सम्मेलन रद्द
अमर उजाला ब्यूरो/ वृंदावन
Updated Sat, 15 Oct 2016 01:35 PM IST
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धार्मिक ग्रंथ, संतों, मंदिर, मठ और आश्रमों पर विवादित टिप्पणी देकर घिरे स्वामी बालेंदू ने दो दिवसीय नास्तिक सम्मेलन को रद्द कर दिया है। बालेंदू के गुरुवार को दिए बयान पर शुक्रवार को भी भारी विरोध हुआ। संत समाज, विभिन्न धर्मोें से जुड़े लोगों और राजनीतिक दलों ने नारेबाजी की और पुतला फूंक विरोध जताया।
शुक्रवार को सुबह से ही संत, हिंदूवादी, राजनीतिक दल और मुस्लिम समाज के लोग भारी संख्या में बालेंदू के परिक्रमा मार्ग स्थित अम्माजी होटल पहुंच गए। यहीं नास्तिक सम्मेलन होना था। संतों और स्थानीय लोगाें ने जमकर नारेबाज की और पुतला फूंका।
तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। फिर भी भीड़ में एक युवक ने अम्माजी होटल पर पत्थर फेंककर शीशा तोड़ दिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया है। वहीं एसपी सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ और एलाआईयू के अधिकारी मौके पर जमे रहे। बालेंदू के संतों से माफी मांगने और भविष्य में ऐसे आयोजन न करने के आश्वासन पर मामला शांत हो पाया।
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होटल में आग लगाने को आमादा थी भीड़
नास्तिक सम्मेलन का विरोध करने आए लोग एक बार को पुलिस के काबू से बाहर हो चले थे। भीड़ आयोजन स्थल को आग लगाने पर आमादा थी। पुलिस के बीचबचाव और बालेंदू के लिखित माफीनामे पर ही लोग माने। बालेंदू ने भविष्य में नास्तिक सम्मेलन न आयोजित करने का आश्वासन भी दिया।
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शुक्रवार को सुबह से ही संत, हिंदूवादी, राजनीतिक दल और मुस्लिम समाज के लोग भारी संख्या में बालेंदू के परिक्रमा मार्ग स्थित अम्माजी होटल पहुंच गए। यहीं नास्तिक सम्मेलन होना था। संतों और स्थानीय लोगाें ने जमकर नारेबाज की और पुतला फूंका।
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तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। फिर भी भीड़ में एक युवक ने अम्माजी होटल पर पत्थर फेंककर शीशा तोड़ दिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया है। वहीं एसपी सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ और एलाआईयू के अधिकारी मौके पर जमे रहे। बालेंदू के संतों से माफी मांगने और भविष्य में ऐसे आयोजन न करने के आश्वासन पर मामला शांत हो पाया।
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होटल में आग लगाने को आमादा थी भीड़
नास्तिक सम्मेलन का विरोध करने आए लोग एक बार को पुलिस के काबू से बाहर हो चले थे। भीड़ आयोजन स्थल को आग लगाने पर आमादा थी। पुलिस के बीचबचाव और बालेंदू के लिखित माफीनामे पर ही लोग माने। बालेंदू ने भविष्य में नास्तिक सम्मेलन न आयोजित करने का आश्वासन भी दिया।
सम्मेलन में आए लोगों ने झेला आक्रोश
दो दिवसीय नास्तिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए शुक्रवार को सुबह से ही लोगों के आने का क्रम शुरू हो गया था। एलआईयू के अधिकारियों के अनुसार करीब 250 लोग आए। उन्हें भी विरोध कर रहे लोगाें का आक्रोश झेलना पड़ा। देशभर से आए लोग स्थानीय लोगाें के आक्रोश को भांपकर लौटने लगे। इस दौरान कुछ लोगों ने सम्मेलन में आए लोगों की पिटाई भी कर दी। दिल्ली से आईं एक महिला पत्रकार दयावती ने आयोजकों के समर्थन में बातें कीं तो संतों और लोगों ने उनका कैमरा छीनने का प्रयास करते हुए मारपीट की। पुलिस ने उन्हें बचाया।
एसपी सिटी, आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि दार्शनिक सम्मेलन के नाम पर आयोजन की अनुमति मांगी गई थी। इसके बाद आयोजकों ने कोतवाली पुलिस को सूचना दिए बगैर उच्च अधिकारियों से नास्तिक सम्मेलन की अनुमति मांगी। आयोजक के विवादित बयान की जांच की जा रही है। जांच में आरोप सही पाए गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अंधेरे में एकत्रित हुए नास्तिक
वृंदावन (मथुरा)। सनातन धर्म प्रेमियों और आस्तिकों के दिनभर चले विरोध से बैकफुट पर आए नास्तिक सम्मेलन के आयोजक बालेंदू ने लिखित माफीमाने के बाद भी शुक्रवार रात कथित तौर पर अपने आश्रम में इस सम्मेलन का आयोजन किया। इस मामले में कोतवाली प्रभारी मुनीष चंद्र का कहना है कि वादे के मुताबिक बालेंदू ने आश्रम में कोई नास्तिक सम्मेलन नहीं किया। वहीं आश्रम की चारदीवारी से सटे दूसरे आश्रमों और मकानों में रहने वाले लोगों का कहना था कि अम्माजी होटल के पीछे आश्रम में भोजन के बाद देर रात यह आयोजन हुआ। लोगों ने इसे नास्तिक सम्मेलन ही बताया।
एसपी सिटी, आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि दार्शनिक सम्मेलन के नाम पर आयोजन की अनुमति मांगी गई थी। इसके बाद आयोजकों ने कोतवाली पुलिस को सूचना दिए बगैर उच्च अधिकारियों से नास्तिक सम्मेलन की अनुमति मांगी। आयोजक के विवादित बयान की जांच की जा रही है। जांच में आरोप सही पाए गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अंधेरे में एकत्रित हुए नास्तिक
वृंदावन (मथुरा)। सनातन धर्म प्रेमियों और आस्तिकों के दिनभर चले विरोध से बैकफुट पर आए नास्तिक सम्मेलन के आयोजक बालेंदू ने लिखित माफीमाने के बाद भी शुक्रवार रात कथित तौर पर अपने आश्रम में इस सम्मेलन का आयोजन किया। इस मामले में कोतवाली प्रभारी मुनीष चंद्र का कहना है कि वादे के मुताबिक बालेंदू ने आश्रम में कोई नास्तिक सम्मेलन नहीं किया। वहीं आश्रम की चारदीवारी से सटे दूसरे आश्रमों और मकानों में रहने वाले लोगों का कहना था कि अम्माजी होटल के पीछे आश्रम में भोजन के बाद देर रात यह आयोजन हुआ। लोगों ने इसे नास्तिक सम्मेलन ही बताया।