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अटल ने मुंबई में की थी भविष्यवाणी- अंधेरा छंटेगा, सूरज उगेगा और कमल खिलेगा
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 17 Aug 2018 06:59 AM IST
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Atal bihari vajpayee
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पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने अरब सागर के तट पर मुंबई में यह भविष्यवाणी की थी अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा। उनके ये शब्द पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए संजीवनी बनी जो आज तक उन्हें संबल देते रहे हैं।
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6 अप्रैल 1980 में मुंबई में अटल बिहारी वाजपेयी ने भाजपा के पहले राष्ट्रीय अधिवेशन में बतौर अध्यक्षीय भाषण दिया था। उस समय एक राजनीतिक दल के रूप में भाजपा की ताकत उतनी नहीं थी। तब वाजपेयी ने अध्यक्षीय भाषण के अंत में कहा था कि भारत के पश्चिमी घाट को मंडित करने वाले महासागर के किनारे खड़े होकर मैं ये भविष्यवाणी करने का साहस करता हूं कि अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा। अटल के इस भाषण ने पार्टी कार्यकर्ताओं को जोश से भर दिया था।
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38 साल पहले की गई भविष्यवाणी सच साबित हुई और आज देश के 31 राज्यों में से 19 में भाजपा या भाजपा गठबंधन की सरकार है। पार्टी के पहले अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए वाजपेयी ने देश की राजनीति और उन नेताओं पर सवाल खड़े किए थे जो पद और प्रतिष्ठा की ताक में रहते हैं। उन्होंने कहा था कि भाजपा का अध्यक्ष पद कोई अलंकार की वस्तु नहीं है। यह पद नहीं दायित्व है, प्रतिष्ठा नहीं है परीक्षा है, ये सम्मान नहीं है चुनौती है। मुझे भरोसा है कि आपके सहयोग और देश की जनता के समर्थन से मैं इस जिम्मेदारी को ठीक तरह से निभा सकूंगा। उस समय उन्होंने पार्टी के नेताओं को आगाह किया था कि पैसा और प्रतिष्ठा के पीछे पागल होने वालों के लिए हमारे यहां कोई जगह नहीं है।
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राजनीति ने कपड़ों को भी सेकुलर और कम्युनल में बांट दिया है
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपा शंकर सिंह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी अजातशत्रु थे। पार्टी की विचारधारा भले ही अलग हो लेकिन इसको लेकर उन्होंने कभी भेदभाव नहीं किया। उत्तर भारत का होने के कारण मुंबई आने पर मुझे हमेशा ही अटल जी का स्नेह मिला। एक बार बतौर प्रधानमंत्री वाजपेयी गोवा आए थे। गोवा से उन्हें मुंबई आना था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख लातूर में थे। उस समय मैं महाराष्ट्र का गृह राज्यमंत्री था। देशमुख ने वाजपेयी को एयरपोर्ट पर रिसीव करने की जिम्मेदारी मुझे दी। मैं अटल जी को एयरपोर्ट पर रिसीव करने पहुंचा। उस दिन पहली बार वाजपेयी को धोती-कुर्ता के बजाए कुर्ता पायजामा पहने देखा तो मैंने कहा अटल जी आज आप पूरी तरह सेकुलर लग रहे हो। विनोदी स्वभाव के वाजपेयी ने हंसते हुए कहा कि कृपाशंकर जी सेकुलर क्या होता है और कम्युनल क्या। आज तक समझ नहीं सका कि राजनीति ने भी कपड़ों को सेकुलर और कम्युनल में बांट दिया है।