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Hindi News ›   India News ›   Atal Bihari Vajpayee Funeral  preparations started from 11 o'clock on Thursday morning

गुरुवार सुबह 11 बजे से ही स्मृति स्थल में शुरू हो गई थीं अटलजी के अंत्येष्टि की तैयारियां

Fri, 17 Aug 2018 08:06 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली 
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली  Updated Fri, 17 Aug 2018 08:06 PM IST
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Atal Bihari Vajpayee Funeral  preparations started from 11 o'clock on Thursday morning
- फोटो : pti

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर किया गया। स्मृति स्थल में अंतिम संस्कार को लेकर गुरुवार सुबह से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। 

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स्मृति स्थल जवाहर लाल नेहरू के स्मारक शांति वन और लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक विजय घाट के मध्य स्थित है। स्मृति स्थल तकरीबन दो एकड़ में फैला हुआ है और यहीं पर अंतिम संस्कार के बाद पूर्व प्रधानमंत्री का समाधि स्थल बनाया जाएगा। इससे पहले दिसंबर 2012 में पूर्व प्रधानमंत्री आईके गुजराल का अंतिम संस्कार यमुना किनारे स्मृति स्थल पर किया गया था।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम सांस लेने से पहले ही स्मृति स्थल को लेकर तैयारियां शुरू हो गई थीं। 

सूत्रों के मुताबिक गुरुवार सुबह 11 बजे से ही स्मृति स्थल पर साफ सफाई का काम शुरू हो गया था। जहां 24 घंटे अनावरत कार्य चला। इसी के साथ-साथ उनके आवास 6ए कृष्णमेनन मार्ग और भाजपा मुख्यालय पर जरूरी इंतजाम किए जाने लगे। अटल जी के शाम साढ़े पांच बजे अधिकारिक मृत्यु की घोषणा से पहले ही 12 बजे भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेता वाजपेयी के आवास पर पहुंच चुके थे।

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भाजपा अध्यक्ष तैयारियों को लेकर लगातार संपर्क में थे

Atal Bihari Vajpayee Funeral  preparations started from 11 o'clock on Thursday morning
अंतिम यात्रा में पैदल चलते हुए पीएम मोदी - फोटो : Ani

अटलजी के आवास पर तैयारियों बीड़ा केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, धर्मेन्द्र प्रधान, सुधांशु मित्तल समेत अन्य भाजपा नेताओं ने संभाला। जिसके बाद उनके आवास के बाहर मीडिया पोडियम, बैरिकेडिग और टैंट लगाने का काम युद्धस्तर पर शुरू हो गया। वहीं एम्स में मौजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तैयारियों को लेकर लगातार संपर्क में बने हुए थे। इधर, शाम होते-होते अटलजी के अंत्येष्टि समेत पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तय हो गई।

इससे पहले गुरुवार सुबह से अटलजी के अंत्येष्टि स्थल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यूपीए सरकार ने यमुना नदी के किनारे किसी भी प्रकार का निर्माण पर रोक लगा दी थी। लेकिन मोदी कैबिनेट की बैठक में यूपीए सरकार के फैसले को पलट कर स्मृति स्थल में अंत्येष्टि कराने का फैसला किया। 

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला हुआ कि वाजपेयी की समाधि दो पूर्व प्रधानमंत्रियों- जवाहरलाल नेहरू (शांति वन) और लाल बहादुर शास्त्री (विजय घाट) की समाधियों के बीच बनाई जाएगी। वहीं कैबिनेट का फैसला आने के बाद सुरक्षा बलों ने स्मृति स्थल के आसपास के इलाकों में ऐहतियातन तलाशी अभियान भी चलाया।

पिछले 27 सालों में इतने बड़े स्तर पर कोई अंतिम संस्कार नहीं हुआ

Atal Bihari Vajpayee Funeral  preparations started from 11 o'clock on Thursday morning

गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा बलों को स्मृति स्थल के अंदर और बाहर तैनात किया गया। साथ ही, बीएसएफ की एक टुकड़ी पहले से ही स्मृति स्थल की निगरानी करती रही है। उस टुकड़ी के अलावा भी अतिरिक्त सुरक्षाबल की तैनाती की गई।

खुद दिल्ली पुलिस को भी उम्मीद नहीं थी कि अटलजी के अंतिम संस्कार से पहले शवयात्रा में इतनी भारी भीड़ जुटेगी। क्योंकि पिछले 27 सालों में इतने बड़े स्तर पर कोई अंतिम संस्कार नहीं हुआ। आखिरी बार 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद उनकी शव यात्रा में लाखों लोग शामिल हुए थे। इस बार दिल्ली पुलिस ने सुबह 8 बजे से ही राजधानी की 25 सड़कों को बंद कर दिया था, साथ ही शव यात्रा के पूरे मार्ग पर सीसीटीवी भी लगाए गए।

गौरतलब है कि दिल्ली में राजघाट के नजदीक 240 एकड़ के इलाके में लगभग 15 समाधियां हैं। जिनमें राजघाट में महात्मा गांधी, शांति वन में जवाहरलाल नेहरु व संजय गांधी, विजय घाट में लाल बहादुर शास्त्री व उनकी पत्नी, शक्तिस्थल में इन्दिरा गांधी, वीरभूमि में राजीव गांधी, किसान घाट में चरण सिंह, संघर्ष स्थल में देवीलाल, समता स्थल में बाबू जगजीवन राम, एकता स्थल में ज्ञानी जैल सिंह, उदय भूमि में के.आर. नारायणन, स्मृति स्थल में चन्द्रशेखर, डॉ. शंकरलाल शर्मा और आर. वेंकटरमन की समाधि स्थल बने हुए हैं।

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