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Assembly Elections 2023: मुद्दा-लहरविहीन चुनाव में बूथ जीतकर फतह की कोशिश में भाजपा, ऐसे हो रही रणनीति तैयार
Thu, 16 Nov 2023 06:19 AM IST
यशोधन शर्मा
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 16 Nov 2023 06:19 AM IST
सार
पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि केंद्रीय मुद्दे और लहर के अभाव में अलग-अलग सीट पर अलग-अलग स्थानीय समीकरण हावी हैं। किसी दल के पक्ष या विपक्ष में बयार नहीं बह रही।
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भाजपा।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
केंद्रीय मुद्दे और विरोध या पक्ष में लहर के अभाव के बीच हो रहे राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में भाजपा को बूथ प्रबंधन के जरिये जीत हासिल करने का भरोसा है।
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इन तीनों ही राज्यों में जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी सीट दर सीट मुद्दों और समीकरणों के हिसाब से चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। इस कड़ी में पार्टी नजदीकी मुकाबले वाली सीटों की पहचान कर बूथ स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट का सहारा ले रही है।
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पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि केंद्रीय मुद्दे और लहर के अभाव में अलग-अलग सीट पर अलग-अलग स्थानीय समीकरण हावी हैं। किसी दल के पक्ष या विपक्ष में बयार नहीं बह रही। बीते चुनाव में जीत हासिल करने वाले कई विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर मतदाताओं में नाराजगी है। इसके कारण ज्यादातर सीटों पर नजदीकी मुकाबले के आसार बन रहे हैं।
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शाह ने संभाला जिम्मा
तीनों ही राज्यों में भाजपा ने बूथ जीतो-चुनाव जीतो का मंत्र अपनाते हुए स्थानीय समीकरण को साधने के साथ बूथ प्रबंधन पर सर्वाधिक जोर दिया है। गृह मंत्री अमित शाह अलग-अलग संभाग में बूथ प्रबंधन का लगातार जायजा ले रहे हैं। बूथ प्रभारियों, पन्ना प्रमुखों से मतदान के दिन पहले तीन घंटे के दौरान समर्थक मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
मतदान के दिन हर घंटे अपडेट होगी स्थिति
प्रत्येक बूथ के प्रभारी हर घंटे बताएंगे कि उनके बूथ पर कितने पार्टी समर्थक मतदाता वोट डाल चुके हैं। हर छह बूथ की जिम्मेदारी स्थानीय वरिष्ठ नेता को दी गई है। इन्हें हर हाल में सभी समर्थक मतदाताओं को बूथ पहुंचाना सुनिश्चित करना है।
70 फीसदी सीट पर नजदीकी मुकाबला
पार्टी के मुताबिक, तीनों राज्यों की 70 फीसदी सीटों पर नजदीकी मुकाबला है। जीत-हार का अंतर कम होगा। ऐसे में पार्टी समर्थकों को अधिक से अधिक संख्या में बूथ पर लाने में कामयाब रही तो मुकाबला पक्ष में जाएगा।
एंटी इन्कम्बेंसी के लिए खास तैयारी
स्थानीय स्तर पर एंटी इन्कम्बेंसी को कम या खत्म करने के लिए पार्टी ने मप्र में 28 तो राजस्थान में डेढ़ दर्जन विधायकों के टिकट काटे। मप्र और राजस्थान में सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों पर दांव लगाया। जीतने की क्षमता रखने वाले 70 साल से अधिक उम्र के नेताओं को भी टिकट दिया। दोनों ही राज्यों में 70 साल से अधिक उम्र के करीब डेढ़ दर्जन उम्मीदवार हैं।