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सवाल : क्या नाराज किसानों ने तोड़ा मोदी और शाह का सपना, चुनावी नतीजों से संयुक्त किसान मोर्चा खुश

Sun, 02 May 2021 09:36 PM IST
योगेश साहू अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 02 May 2021 09:36 PM IST
सार

 पांच विधानसभा राज्यों के चुनाव में किसानों ने भाजपा को वोट न देने की अपील की थी। किसानों से भाजपा को छोड़ बाकी किसी को भी वोट देने की बात कही गई थी।

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Assembly Election Results 2021 : Did angry farmers break pm narendra Modi and amits shahs dream, sanyukt kisan morcha happy
पीएम मोदी, अमित शाह और ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम बंगाल फतह करने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का सपना फिलहाल टूट गया है। तृणमूल कांग्रेस यहां भारी जीत हासिल करने की ओर बढ़ रही है और भाजपा 80 से भी कम सीटों पर सिमटती दिखाई दे रही है। इस चुनावी रुझान के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि भाजपा बंगाल में जिस भारी जनसमर्थन की उम्मीद कर रही थी, वह उसे क्यों नहीं मिल पाया? क्या किसानों की नाराजगी उस पर भारी पड़ी है जो इन चुनावों में लगातार भाजपा के बहिष्कार की अपील कर रहे थे?

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किसान नेताओं का दावा है कि उनके किसान आंदोलन का ही असर हुआ है कि भाजपा को उन सीटों पर भी भारी हार का सामना करना पड़ा, जहां भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया था। यह असर केवल पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि उन इलाकों में भी दिखा जहां किसानों की बेहतर भागीदारी रही है।
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किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान जारी कर इन चुनाव परिणामों का स्वागत किया है। संगठन ने कहा है कि इन चुनाव परिणामों से सीख लेते हुए केंद्र सरकार को विवादित कृषि कानून वापस ले लेना चाहिए। नए कृषि कानून के खिलाफ देश के किसान पिछले वर्ष 26 नवंबर से ही धरना दे रहे हैं। किसानों का यह विरोध प्रदर्शन आज भी जारी है।
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किसानों ने चुनाव के समय भाजपा के बहिष्कार का फैसला लिया था। किसान नेताओं ने पश्चिम बंगाल सहित अन्य चुनावी राज्यों में सभाएं कर किसानों को कृषि कानूनों के नकरात्मक असर के प्रति जागरूक किया था और उनसे भाजपा को वोट न देने की अपील की थी। पश्चिम बंगाल में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी जनसभाएं की थीं।

किसान नेता अविक साहा ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमर उजाला से कहा कि पूरे देश का किसान केंद्र सरकार की नीतियों से परेशान था। वह केंद्र सरकार से लगातार तीन नए कृषि कानून वापस लेने की अपील कर रहा था, लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों की मांग को लगातार अनसुना किया। यही कारण था कि किसान संयुक्त मोर्चा ने इन चुनावों में भाजपा के बहिष्कार की अपील की थी। 


उन्होंने कहा कि चुनावों में हमने केवल भाजपा के बहिष्कार की बात कही थी, लेकिन हमने किसी के पक्ष में वोट देने के लिए भी नहीं कहा था। जनता को जो भी विकल्प बेहतर लगा, उसने उसे वोट दिया। लेकिन इस चुनाव परिणाम के बाद अब वे केंद्र सरकार से अपील करेंगे कि वह किसानों के गुस्से को समझे और तीनों नए कृषि कानून वापस ले।

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