फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   assam secret killing case former cm prafulla mahanta got clean chit from gauhati high court

Assam: 'गुप्त हत्या' के मामले में पूर्व सीएम प्रफुल्ल महंत को मिली क्लीन चिट, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Wed, 14 Jun 2023 02:56 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 14 Jun 2023 02:56 PM IST
सार

जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस मिताली ठाकुरिया की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता ने फैसले के 531 दिन बाद क्यों इंटरलॉक्यूटरी एप्लीकेशन दायर की? याचिका में देरी की वजह भी नहीं बताई गई है।

विज्ञापन
assam secret killing case former cm prafulla mahanta got clean chit from gauhati high court
प्रफुल्ल महंत - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

90 के दशक में असम की राजनीति में भूचाल लाने वाले गुप्त हत्याकांड (Secret Killing Case) मामले में पूर्व सीएम प्रफुल्ल महंत को गुवाहाटी हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दरअसल गुवाहाटी  हाईकोर्ट ने प्रफुल्ल महंत को क्लीन चिट देते हुए गुप्त हत्याकांड मामले में दायर इंटरलॉक्यूटरी एप्लीकेशन (interlocutory application) को खारिज कर दिया है। गुवाहाटी हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सोमवार को दिए अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता अपने दावे के पक्ष में सबूत पेश करने में विफल रहे हैं। 
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने की ये टिप्पणी
बता दें कि इंटरलॉक्यूटरी एप्लीकेशन राज्य सभा सांसद अजित कुमार भुयन और अनंत कालिता ने हाईकोर्ट में दायर की थी। इस याचिका में 3 सितंबर 2018 के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कोर्ट ने गुप्त हत्याकांड की जांच के लिए बने आयोग को अवैध बताकर खारिज कर दिया था। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस मिताली ठाकुरिया की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता ने फैसले के 531 दिन बाद क्यों इंटरलॉक्यूटरी एप्लीकेशन दायर की? याचिका में देरी की वजह भी नहीं बताई गई है। ऐसे में कोर्ट ने रिट अपील को भी खारिज कर दिया। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- Assam: असम के तीन जिले बाढ़ की चपेट में, लोग हुए बेघर, मुख्यमंत्री ने विशेष कदम उठाने के दिए निर्देश
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या है पूरा विवाद
उल्लेखनीय है कि साल 1998 से लेकर 2001 के बीच असम में उग्रवादी संगठन उल्फा से जुड़े लोगों के रिश्तेदारों और परिजनों की हत्याएं हुईं। इन हत्याओं के कातिल के बारे में कुछ पता नहीं चल सका तो इन्हें गुप्त हत्याकांड का नाम दे दिया गया। इसके आरोप राज्य के सीएम रहे प्रफुल्ल महंत पर लगे। साल 2005 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हत्याओं की जांच के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) केएन सैकिया की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया था।

आयोग ने 2007 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, जिसमें प्रफुल्ल महंत को आरोपी बनाया गया। इसके खिलाफ महंत ने गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख किया। जिस पर सितंबर 2018 में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने जांच आयोग को अवैध बताकर खारिज कर दिया। इसके बाद 2021 में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली इंटरलॉक्यूटरी याचिका दायर की गई, जिसे अब हाईकोर्ट द्वारा अवैध बताकर खारिज कर प्रफुल्ल महंत को बड़ी राहत दी है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed