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Assam: क्या श्रम कानूनों के उल्लंघन के मामलों में खत्म होगी जेल की सजा? असम विधानसभा में 10 संशोधन विधेयक पेश
Tue, 20 Dec 2022 05:46 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 20 Dec 2022 05:46 PM IST
सार
श्रम कल्याण मंत्री संजय किशन ने शीतकालीन सत्र के पहले विधानसभा में दस विधेयकों को पेश किया। मंत्री ने कहा, सभी श्रम कानूनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए प्रस्तावित संशोधन नागरिक दंड से लगाकर लाए गए हैं।
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असम विधानसभा
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
असम सरकार ने मंगलवार को निजी क्षेत्र के कर्मचारियों से जुड़े दस श्रम कानून संशोधन विधेयक पेश किए। इन सभी विधेयकों में कारावास को दंडात्मक व्यवस्था से हटाया गया है, जबकि जुर्माने की राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया है।
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श्रम कल्याण मंत्री संजय किशन ने शीतकालीन सत्र के पहले विधानसभा में विधेयकों को पेश किया। मंत्री ने कहा, सभी श्रम कानूनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए प्रस्तावित संशोधन नागरिक दंड से लगाकर लाए गए हैं।
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एक बयान में उन्होंने कहा, गैर-अपराधीकरण के पीछे का तर्क यह है कि आर्थिक अपराधों के लिए कारावास बहुत गंभीर सजा है। इसमें दुर्भावना शामिल नहीं है। उन्होंने कहा, कारावास से जुड़े अपराध के आसपास कानूनी प्रक्रिया नियोक्ताओं के बीच चिंता को बहुत बढ़ा देती है। इस तरह की प्रक्रियाओं की संभावना कम होने से व्यापार करने में आसानी होती है।
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किशन ने कहा, आपराधिक दंड, खासतौर पर कारावास का डर, अक्सर अनजाने में किए गए अपराध, कम व्यापार निवेश का एक प्रमुख कारण है।
उन्होंने जोर देकर कहा, भारी जुर्माने के साथ मजबूत निवारक प्रावधानों का विचार नियोक्ताओं को निर्विवाद आंतरिक संगठनात्मक और परिचालन तंत्र के लिए मजबूर करेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि अनुपालन में कोई चूक न हो। मंत्री ने दावा किया कि इससे नियोक्ताओं को श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए कारावास के डर से मुक्ति मिलेगी।